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प्रश्न
कुटज के बारे में उसकी विशेषताओं को बताने वाले दस वाक्य पाठ से छाँटिए और उनकी मानवीय संदर्भ में विवेचना कीजिए।
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
- शिवालिक की सूखी नीरस पहाड़ियों पर मुसकुराते हुए ये वृक्ष द्वंद्वातीत हैं, अलमस्त हैं।
- अजीब सी अदा है मुसकुराता जान पड़ता है।
- उजाड़ के साथी, तुम्हें अच्छी तरह पहचानता हूँ।
- धन्य हो कुटज, तुम 'गाढ़े के साथी हो।'
- कुटज अपने मन पर सवारी करता है, मन को अपने पर सवार नहीं होने देता।
- कुटज इन सब मिथ्याचारों से मुक्त है। वह वशी है। वह वैरागी है।
- सामने कुटज का पौधा खड़ा है वह नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय जीवनी शक्ति की घोषण करता है।
- मनोहर कुसुम-स्तबकों से झबराया, उल्लास-लोल चारुस्मित कुटज।
- कुटज तो जंगल का सैलानी है।
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हजारी प्रसाद द्विवेदी
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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