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कंठ रुक रहा है, काल आ रहा है- यह भावना कवि के मन में क्यों आई?

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प्रश्न

कंठ रुक रहा है, काल आ रहा है- यह भावना कवि के मन में क्यों आई?

टीपा लिहा
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उत्तर

कवि का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण रहा है। उसने बहुत ही कठिन हालतों का सामना किया है। जीवन में वेदना और दुख ने उसका कभी पीछा नहीं छोड़ा है। शोषक वर्गों के अत्याचार और शोषण ने उसे बहुत दुखी किया है। उसने जब भी विरोध किया है, उसकी आवाज़ को दबाया दिया गया है। उसने फिर भी हार नहीं मानी और इन सबसे लड़ता रहा है। परन्तु इन सब हालतों से लड़ते हुए उसके अंदर जीने की इच्छा समाप्त हो गई है और वह मरणासन्न स्थिति में पहुँच गया है। और उसे प्रतीत हो रहा है कि उसका कंठ अब कुछ कहने में समर्थ नहीं है तथा उसकी मृत्यु समीप ही है।
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गीत गाने दो मुझे
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पाठ 1.02: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १३]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 1.02 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति)
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १३
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