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किस राष्ट्र का राजनीतिक नेतृत्व किस तरह उस राष्ट्र की विदेश निति पर असर डालता है? भारत की विदेश निति के उदाहरण देते हुए इस प्रश्न पर विचार कीजिए।

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प्रश्न

किस राष्ट्र का राजनीतिक नेतृत्व किस तरह उस राष्ट्र की विदेश निति पर असर डालता है? भारत की विदेश निति के उदाहरण देते हुए इस प्रश्न पर विचार कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

  • हर देश का राजनैतिक नेतृत्व उस राष्ट्र की विदेश निति पर प्रभाव डालता हैं। उदाहरण के लिए -
  1. नेहरू जी के सरकार के काल में गुट - निरपेक्षता की निति बड़ी जोर - शोर से चली लेकिन शास्त्री जी ने पाकिस्तान को ईट का जवाब पत्थर से देकर यह साबित कर दिया की भारत की सेनाएँ हर दुश्मन को जवाब देने की ताकत रखती हैं। उन्होंने स्वाभिमान से जीना सिखाया ताशकंद समझौता किया लेकिन गुटनिरपेक्ष की निति को नेहरू जी के समान जारी रखा।
  2. कहने को श्रीमती इंदिरा नेहरू जी की पुत्री थीं। लेकिन भावनात्मक रूप से वह सोवियत संघ से अधिक प्रभावित थी। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। भूतपूर्व देशी नरेशों के प्रिवीपर्स समाप्त किए। गरीब हटाओं नारा दिया और सोवियत संघ से दीर्घ अनाक्रमक संधि की।
  3. राजीव गाँधी के काल में चीन तथा पाकिस्तान सहित अनेक देशों से संबंध सिधारे गए तो श्रीलंका के उन देशद्रोहियों को दबाने में वहां की सरकार से सहायता देकर यह बात दिया की भारत छोटे - बड़े देशों की अखंडता का सम्मान करता है।
  4. कहने को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एन.डी.ए. की सरकार कुछ ऐसे तत्वों से प्रभावित थी जो सांप्रदायिक आक्षेप से बदनाम किए जाते हैं लेकिन उन्होंने चीन,रूस,अमरीका,पाकिस्तान,बांग्लादेश,श्रीलंका,जर्मनी,ब्रिटेन, फ्रांस आदि सभी देशों से विभिन्न क्षेत्रों में समझौते करके बस, रेल वायुयान,उदारीकरण, उन्मुक्त व्यापार, वैश्वीकरण और आतंकवादी विरोधी निति को अंतर्राष्ट्रीय मंचों और पड़ोसी देशों में उठकर यह साबित कर दिया की भारत की विदेश निति केवल देश हित में होगी उस पर धार्मिक या किसी राजनैतिक विचारधारा का वर्चस्व नहीं होगा। अटल बिहारी वाजपेय की विदेश निति, नेहरू जी की विदेश निति से जुदा न होकर लोगों को अधिक प्यारी लगी क्योंकि देश में परमाणु शक्ति का विस्तार हुआ तथा अमेरिका के साथ संबंधों में बहुत सुधार हुआ। 'जय जवान' के साथ आपने नारा दिया 'जय जवान जय किसान और जय विज्ञान'
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गुटनिरपेक्षता की नीति
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 4: भारत के विदेश संबंध - प्रश्नावली [पृष्ठ ८१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rajneeti Vigyaan Swatantra Bharat me Rajneeti [Hindi] Class 12
पाठ 4 भारत के विदेश संबंध
प्रश्नावली | Q 9. | पृष्ठ ८१

संबंधित प्रश्‍न

इस बयान के आगे सही या गलत का निशान लगाएँ:

गुटनिरपेक्षता की निति अपनाने के कारण भारत, सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमरीका, दोनों की सहायता हासिल कर सका।


इस बयान के आगे सही या गलत का निशान लगाएँ:

अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध शुरुआत से ही तनावपूर्ण रहे।


निम्नलिखित का सही जोड़ा मिलाएँ:

(क) 1950 - 64 के दौरान भारत की विदेश निति का लक्ष्य (i) तिब्बत के धार्मिक नेता जो सीमा पार कर के भारत चले आए।
(ख) पंचशील (ii) क्षेत्रीय अंखडता और संप्रभुता की रक्षा तथा आर्थिक विकास।
(ग) बांडुंग सम्मेलन (iii) शांतिपूर्ण सह - अस्तित्व के पाँच सिद्धांत।
(घ) दलाई लामा (iv) इसकी परिणति गुटनिरपेक्ष आंदोलन में हुई।

नेहरू विदेश निति के संचालन को स्वतंत्रता का एक अनिवार्य संकेतक क्यों मानते थे? अपने उत्तर में दो कारण बताएँ और उनके पक्ष में उदाहरण भी दें।


अगर आपको भारत की विदेश निति के बारे में फैसला लेने को कहा जाए तो आप इसकी किन दो बातों को बदलना चाहेंगे। ठीक इसी तरह यह भी बताएँ की भारत की विदेश निति के किन दो पहलुओं को आप बरकरार रखना चाहेंगे। अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।


निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

गुटनिरपेक्ष का व्यापक अर्थ है अपने को किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं करना इसका अर्थ होता है चीजों को यथासंभव सैन्य दृष्टिकोण से न देखना और इसकी कभी जरूरत आन पड़े तब भी किसी सैन्य गुट के नज़रिए को अपनाने की जगह स्वतंत्र रूप से स्थिति पर विचार करना तथा सभी देशों के साथ रिश्ते कायम करना

- जवाहरलाल नेहरू

  1. नेहरू सैन्य गुटों से दुरी क्यों बनाना चाहतें थे?
  2. क्या आप मानते हैं की भारत - सोवियत मैत्री की संधि से गुटनिरपेक्ष के सिद्धांतों का उललंघन हुआ? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
  3. अगर सैन्य - गुट न होते तो क्या गुटनिरपेक्षता की निति बेमानी होती?

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