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किन पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है?

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प्रश्न

किन पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

नीचे दी गई पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति की अनुभूति से वंचित है।-

कल मैंने जाना कि वसंत आया।
और यह कैलेंडर से मालूम था
अमुक दिन अमुक बार मदनमहीने की होवेगी पंचमी
दफ़्तर में छुट्टी थी- यह था प्रमाण
और कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल
आम बौर आवेंगे

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वसंत आया
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.05: रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ३९]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 1.05 रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो)
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ३९
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