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प्रश्न
कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
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उत्तर
अगर मैं नानीजी या नानाजी की जगह होते, तो सबसे पहले बच्चे की सही जाँच करते माथा छूकर, नब्ज देखकर और उससे पूछकर कि तकलीफ कहाँ है। बिना पूरी जाँच के सिर्फ अंदाजे पर दवाई नहीं देते। बच्चे को दिन भर भूखा नहीं रहने देते, बल्कि हल्का और जल्दी पचने वाला खाना देते जैसे दलिया, खिचड़ी, फल, गुनगुना सूप या साबूदाने की खीर। कड़वी पुड़िया या दवाई देने से पहले पता करते कि वह सचमुच जरूरी है या नहीं। बच्चे को अकेला भी नहीं छोड़ते कोई न कोई पास बैठकर उससे बातें करता, कहानियाँ सुनाता और आराम करने को कहता। अगर बुखार असली लगता या बढ़ता दिखता, तो तुरंत डॉक्टर को बुलाते। साथ ही प्यार से बच्चे से स्कूल और पढ़ाई की बात भी पूछते, क्योंकि कई बार बच्चे स्कूल से बचने के लिए ही बीमारी का बहाना बनाते हैं ऐसे में डाँटने की बजाय उसकी असली परेशानी, जैसे अधूरा होमवर्क, निपटाने में मदद करते।
