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कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?

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प्रश्न

कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

अगर बच्चा उस दिन स्कूल जाता, तो उसका दिन घर के बोरियत भरे दिन से कहीं बेहतर होता। हाँ, होमवर्क न करने की सजा जरूर मिलती शायद वह कक्षा में खड़ा होता या अगले दिन होमवर्क दिखाने का वादा करता पर वह बात कुछ ही देर की होती। उसके बाद वह पूरे दिन दोस्तों के साथ पढ़ाई और खेल का मजा लेता। रिसेस में वह ठेले पर जाकर नमक-मिर्च लगे अमरूद दोस्तों के साथ कटर-कटर खाता और खेल के समय खूब दौड़ता-कूदता। अगले दिन स्कूल जाकर वह सबसे पहले अपना होमवर्क पूरा करके शिक्षक को दिखाता, बीमारी के बहाने के लिए माफी माँगता, किसी दोस्त से छूटा हुआ काम पूछकर कॉपी में लिखता और दोपहर को खुशी-खुशी घर लौटता। घर आकर वह गरम दाल-चावल और तली हरी मिर्च जी भरकर खाता न भूखे रहने की मुसीबत, न मुन्नू को आम खाते देखकर जलन। तब उसे समझ आता कि स्कूल जाना ही सही निर्णय था।

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पाठ 5: नहीं होना बीमार - पाठ से [पृष्ठ ६५]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 5 नहीं होना बीमार
पाठ से | Q (घ) | पृष्ठ ६५
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