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“खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥” इस पंक्ति में खान-पान, सम्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात की गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

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प्रश्न

“खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥”

इस पंक्ति में खान-पान, सम्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात की गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

कारण सांगा
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उत्तर

“खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै ॥

इन तीनों में सबसे आवश्यक मैं खान-पान को मानता हूँ।

मैं मानता हूँ कि ‘सन्मान’ (सम्मान) इन सबमें अति आवश्यक है। इसके कारण निम्नलिखित है-

  1. सम्मान आत्मसम्मान से जुड़ा है- सम्मान केवल दूसरों से मिलने वाला आदर नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान से भी जुड़ा होता है।
    यदि व्यक्ति को समाज में या अपने मन में खुद के प्रति सम्मान न हो, तो वह किसी भी सुख का आनंद नहीं ले सकता।
  2. सम्मान मिलने से आत्मविश्वास बढ़ता है- सम्मान हमें यह एहसास कराता है कि हम मूल्यवान हैं और इससे हमारी सोच सकारात्मक बनती है। जब सम्मान मिलता है, तब खान-पान और राग-रंग भी आनंददायक लगते हैं।
  3. सम्मान खोने पर बाकी चीजें फीकी लगती हैं- यदि किसी व्यक्ति को लोग तिरस्कार की दृष्टि से देखें या उसकी इज्जत न हो, तो चाहे उसके पास स्वादिष्ट भोजन हो या सुख-सुविधाएँ, उसका मन दुखी ही रहेगा।
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पाठ 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया - पाठ से आगे [पृष्ठ ७९]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया
पाठ से आगे | Q (घ) | पृष्ठ ७९
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