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जीवन जहाँ इठला-इठलाकर लहराता है, वहाँ भला आनंद के स्रोतों की कमी हो सकती है? उद्दाम जीवन के ही वहाँ के अनंत संख्यक गाने प्रतीक हैं। क्या तुम इस बात से सहमत हो? ‘बिदेसिया’ नामक लोकगीत से कोई कैसे आनंद

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प्रश्न

जीवन जहाँ इठला-इठलाकर लहराता है, वहाँ भला आनंद के स्रोतों की कमी हो सकती है? उद्दाम जीवन के ही वहाँ के अनंत संख्यक गाने प्रतीक हैं। क्या तुम इस बात से सहमत हो? ‘बिदेसिया’ नामक लोकगीत से कोई कैसे आनंद प्राप्त कर सकता है। और वे कौन लोग हो सकते हैं जो इसे गाते-सुनते हैं? इसके बारे में जानकारी प्राप्त करके कक्षा में सबको बताओ।

टीपा लिहा
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उत्तर

हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। लोकगीत गाँवों की उन्मुक्त जीवन चर्चा के ही प्रतीक हैं। बिदेसिया नामक लोकगीत से सहज ही आनंद प्राप्त किया जा सकता है। इसमें रसिक प्रेमी-प्रेमिकाओं और परदेशी प्रिय की बात रहती है। इनसे करुण और विरह रस प्रवाहित होता है। ये गीत सीधे हृदय को छूते हैं और सुनने वालों को विशेष आनंद की अनुभूति प्रदान करते हैं। भोजपुरी-भाषी क्षेत्रों में इन्हें खूब गाया जाता है।

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गद्य (Prose) (Class 6)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 14: लोकगीत - अनुमान और कल्पना [पृष्ठ १०२]

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एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 1 Class 6
पाठ 14 लोकगीत
अनुमान और कल्पना | Q 2 | पृष्ठ १०२

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