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प्रश्न
जब बच्ची अपनी माँ से सब बातें कर रही थी, उस समय का आसमान और मौसम कैसा रहा होगा? अपनी कल्पना से बताओ। (संकेत- धूप, सूरज, बादल, धरती, बिजली, लोगों की परेशानियाँ आदि)
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उत्तर
जब बच्ची अपनी माँ से ये सब बातें कर रही थीं, उस समय का आसमान बादलों से भरा हुआ होगा और बारिश का मौसम हो रहा होगा। सभी लोग परेशान होगें कि यदि समय पर वे घर नहीं पहुँचे, तो भीग जाएँगे। आकाश में बादलों की तेज़ गर्जना हो रही होगी। गर्जना के कारण सभी के ह्दय धड़क रहे होगों। चारों तरफ़ बादलों के कारण सूरज छिप गया होगा और अंधकार छा गया होगा। थोड़ी देर में मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गई होगी और लोग अपने सामान आदि को बचाने के लिए तेज़ी से भाग रहे होगें।
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बच्ची __________________________________________
लकड़हारा _____________________________________
_______________________________________________
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नीचे लिखी पंक्ति को पढ़कर उत्तर दो।
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(ख) सन् 1942 ______ ______
कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में 'पीछे-आगे' का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'आगे' का '...बोली ये धागे' से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए-
(क) घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी
(ख) सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा
(ग) पानी का परदा-सामेरे आसपास था हिल रहा
(घ) मँडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास
(ङ) दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा
(च) घास पर फुदकती नन्ही-सी चिड़िया
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