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इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।

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प्रश्न

इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।

कृती
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उत्तर

निराला की कविता “वर दे, वीणावादिनि वर दे!” के विषय में:

यह कविता प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित एक संस्कृतनिष्ठ रचना है। इसमें कवि माँ सरस्वती (वीणावादिनी) से ज्ञान, कला और सामर्थ्य प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। कविता के माध्यम से कवि देश की सांस्कृतिक, मानसिक और बौद्धिक प्रगति की कामना व्यक्त करते हैं।

मुख्य भाव:

  • भारत को ज्ञान, प्रकाश और नई चेतना से भरने की इच्छा।
  • अज्ञानता और अंधकार को समाप्त करने की प्रार्थना।
  • कला, साहित्य और संगीत के विकास को महत्व देना।
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Notes

छात्र स्वयं करें।

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पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [पृष्ठ १७४]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
पाठ 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १७४
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