मराठी

गंगा नदी की अपने उद्गम स्रोत से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

गंगा नदी की अपने उद्गम स्रोत से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।

(संकेत – पर्वतीय सौंदर्य से लेकर गंगासागर तक की संस्कृति इत्यादि)

सविस्तर उत्तर
Advertisements

उत्तर

शीर्षक: गंगा नदी की हिमालय से सागर तक की यात्रा

गंगा की यात्रा केवल एक नदी की धारा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और जीवन की यात्रा है। इसका उद्गम हिमालय की ऊँची पर्वत चोटियों में स्थित गंगोत्री से होता है। यहाँ गंगा का रूप अत्यंत निर्मल, तेज़ और आकर्षक दिखाई देता है।

जब गंगा पर्वतीय क्षेत्रों से निकलकर ऋषिकेश और हरिद्वार के मैदानों में प्रवेश करती है, तो प्राकृतिक दृश्य बदल जाते हैं। यहाँ होने वाली संध्या आरती, मंत्रों की ध्वनि और आध्यात्मिक वातावरण मन को शांति प्रदान करते हैं। आगे बढ़ते हुए गंगा प्रयागराज पहुँचती है, जहाँ वह यमुना से संगम करती है। यह स्थान भारत की विविध संस्कृतियों के मिलन का सुंदर उदाहरण है।

वाराणसी तक पहुँचते-पहुँचते गंगा का प्रवाह शांत और गंभीर हो जाता है। यहाँ के घाटों पर प्राचीन परंपराएँ, संगीत, कला और विभिन्न भाषाओं की झलक देखने को मिलती है। अंत में बिहार और बंगाल के हरे-भरे मैदानों को जीवन देती हुई गंगा विशाल रूप लेकर गंगासागर में बंगाल की खाड़ी में समा जाती है।

“गंगा की यह यात्रा हमें सिखाती है कि निरंतर आगे बढ़ते हुए कठिनाइयों को पार कर लक्ष्य तक पहुँचना चाहिए।”

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [पृष्ठ १७१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
पाठ 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ १७१
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×