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प्रश्न
गांधी जी अपने साथियों की जरूरत के मुताबिक हर काम कर देते थे, लेकिन उनका खुद का काम कोई और करे, ये उन्हें पसंद नहीं था। क्यों? सोचो और अपनी कक्षा में सुनाओ।
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उत्तर
गाँजी जी अपने साथियों की जरूरत के मुताबिक हर काम कर देते थे, लेकिन अपना खुद का काम दूसरों से करवाना उन्हें पसंद नहीं था। जब तक शरीर बिलकुल लाचार न हो, वह किसी की मदद लेना नहीं चाहते थे। उन्हें यह पसंद नहीं था कि केवल महात्मा या बूढ़े होने की वजह से कोई उनकी सहायता करे। वह किसी पर भार नहीं बनना चाहते थे। अपनी जरूरत के लिए दूसरों को परेशान करना भी उन्हें ठीक नहीं लगता था।
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- अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा। ऊपर रेखांकित संज्ञाएँ क्रमशः किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं का संबंध किसी की दशा और किसी कार्य से भी होता है। भाववाचक संज्ञा की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। आगे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़ो और समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और क्रिया से बने हैं। उन्हें भी पहचानकर लिखो-
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घबराहट |
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फुर्ती |
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ताज़गी |
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