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प्रश्न
एक प्राथमिक अभिक्रिया की संतुलित रासायनिक समीकरण के लिए कौन-से कथन लागू होते है ?
- कोटि, आण्विकता के समान होती है।
- कोटि, आण्विकता से कम होती है।
- कोटि, आण्विकता से अधिक होती है।
- अभिक्रिया की आण्विकता कभी शून्य नहीं हो सकती।
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उत्तर
(i) कोटि, आण्विकता के समान होती है।
(iv) अभिक्रिया की आण्विकता कभी शून्य नहीं हो सकती।
स्पष्टीकरण -
एकल-चरण प्राथमिक अभिक्रिया के लिए, क्रम और आण्विकता समान होगी।
रसायन विज्ञान में आण्विकता अणुओं की संख्या है जो एक प्राथमिक (एकल-चरण) अभिक्रिया में अभिक्रिया करने के लिए एक साथ आते हैं और इस प्राथमिक अभिक्रिया में अभिकारकों के स्टोइकोमेट्रिक गुणांक के योग के बराबर है। यदि किसी अभिक्रिया की आण्विकता शून्य मानी जाती है तो इसका अर्थ है कि कोई अभिकारक किसी उत्पाद में परिवर्तित होने वाला नहीं है, इसलिए किसी अभिक्रिया की आण्विकता कभी भी शून्य नहीं हो सकती है।
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\[\ce{2NH3 (g) ->[1130 K][\text{प्लैटिनम उत्प्रेरक}] N2(g) + 3H2 (g)}\]
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कॉलम I और कॉलम II में दिए गए कथनों को सुमेलित कीजिए-
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) अभिक्रिया वेग का गणितीय व्यंजक | (a) वेग स्सिरांक के |
|
(ii) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया |
(b) वेग नियम अभिक्रिया वेग बराबर होता है। |
|
(iii) शून्य कोटि के लिए वेग स्थिरांक की इकाई |
(c) सबसे धीमे चरण की कोटि |
| (iv) एक जटिल अभिक्रिया की कोटि निर्थारित होती है। | (d) अभिक्रिया की दर होती है। |
अभिकथन - अभिक्रिया की कोटि शून्य अथवा भिन्नात्मक हो सकती है।
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तर्क - कोटि का निर्धारण प्रयोग द्वारा होता है तथा आणिवकता वेग निर्धारक प्राथमिक चरण में स्टॉइकियोमितीय गुणांक का योग होती है।
एक उदाहरण की सहायता से समझाइए कि छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया से क्या अभिप्राय है?
