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प्रश्न
“एक काल्पनिक राष्ट्र के व्यय पैटर्न के विश्लेषण से संबंधित एक अध्ययन के अंतर्गत यह पाया गया कि शून्य आय वाले परिवार भी बुनियादी आवश्यकताओं का उपभोग करने में कामयाब रहे। जैसे-जैसे लोगों की आय में वृद्धि हुई वैसे-वैसे उनके उपभोग में भी वृद्धि हुई, परन्तु आय जितनी तीव्रता से नहीं।”
उपरोक्त गद्य व सामान्य ज्ञान के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:
- प्रथम पैरा में दर्शाये गये उपभोग के प्रकार की पहचान व व्याख्या करें। [3]
- सकारण बताए कि, समग्र माँग (AD) वक्र सकारात्मक रूप से ढालू क्यों होता है। [3]
स्पष्ट करा
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उत्तर
- उस परिघटना को स्वायत्त उपभोग कहा जाता है जब आय शून्य होने पर भी उपभोग होता है। यह जीवनयापन के लिये आवश्यक न्यूनतम व्यय को निर्दिष्ट करता है। जैसे भोजन, आवास इत्यादि। परिवार यह व्यय अतीत की बचत का उपयोग करके या उधार लेकर पूरा करते हैं। यह अवधारणा उपभोग फलन में `barc` द्वारा व्यक्त की जाती है।
- आय‑व्यय मॉडल में समष्टि माँग (Aggregate Demand) वक्र ऊपर की ओर इसलिए ढलान रखता है क्योंकि उपभोग प्रेरित स्वभाव का होता है। जैसे ही राष्ट्रीय आय बढ़ती है, परिवारों की प्रयोज्य आय बढ़ती है और उपभोग में वृद्धि होती है। इसे उपभोग के मनोवैज्ञानिक नियमों से समझाया जाता है। चूँकि उपभोग समष्टि माँग का एक प्रमुख घटक है (AD = C + I + G + NX), इसलिए आय के स्तर के बढ़ने पर कुल माँग भी बढ़ जाती है। समष्टि माँग को स्वायत्त और प्रेरित घटकों के रूप में लिखा जाता है, जहाँ स्वायत्त घटक में `barc` शामिल होता है और प्रेरित हिस्सा आय पर निर्भर होता है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
