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ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।

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प्रश्न

ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभव और मान्यताएँ जनमानस की सोच के विपरीत थे। जनमानस का मानना है कि ईश्वर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, तीर्थ स्थलों या दुर्गम स्थानों पर रहता है। मनुष्य उसकी खोज में यहाँ-वहाँ भटकता हुआ जीवन बिता देता है, परंतु कबीर की मान्यता एवं अनुभव के अनुसार-

  • ईश्वर हर प्राणी यहाँ तक कि कण-कण में विद्यमान है।
  • ईश्वर की प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग अत्यावश्यक है।
  • ईश्वर के वियाग में व्यक्ति जी नहीं सकता है। यदि वह जीता है तो उसकी दशा पागलों जैसी हो जाती है।
  • ईश्वर के बारे में जाने बिना कोई ज्ञानी नहीं कहला सकता है।
  • ईश्वर को पाने के लिए विषय-वासनाओं और सांसारिकता का त्याग आवश्यक है।
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साखी
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पाठ 1.1: साखी - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 1.1 साखी
अतिरिक्त प्रश्न | Q 10

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संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौनयहाँ 'सोनाऔर 'जागनाकिसके प्रतीक हैंइसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया हैस्पष्ट कीजिए।


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अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'ऐकै अषिर पीव कापढ़ै सु पंडित होईइस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?


भाव स्पष्ट कीजिए

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।


पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।


मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।


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कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?

  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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