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प्रश्न
ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।
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उत्तर
ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभव और मान्यताएँ जनमानस की सोच के विपरीत थे। जनमानस का मानना है कि ईश्वर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, तीर्थ स्थलों या दुर्गम स्थानों पर रहता है। मनुष्य उसकी खोज में यहाँ-वहाँ भटकता हुआ जीवन बिता देता है, परंतु कबीर की मान्यता एवं अनुभव के अनुसार-
- ईश्वर हर प्राणी यहाँ तक कि कण-कण में विद्यमान है।
- ईश्वर की प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग अत्यावश्यक है।
- ईश्वर के वियाग में व्यक्ति जी नहीं सकता है। यदि वह जीता है तो उसकी दशा पागलों जैसी हो जाती है।
- ईश्वर के बारे में जाने बिना कोई ज्ञानी नहीं कहला सकता है।
- ईश्वर को पाने के लिए विषय-वासनाओं और सांसारिकता का त्याग आवश्यक है।
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भाव स्पष्ट कीजिए −
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भाव स्पष्ट कीजिए −
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।
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