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दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की क्या सीमाएँ हैं? इन सीमाओं को किस तरह पूरा किया जा सकता है?

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प्रश्न

दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की क्या सीमाएँ हैं? इन सीमाओं को किस तरह पूरा किया जा सकता है?

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

श्रव्य माध्यम की सीमाएँ

  1. दृश्य का अभाव: श्रव्य माध्यम में पात्र, स्थान, वस्तुएँ और घटनाएँ दिखाई नहीं देतीं।
  2. हाव-भाव नहीं दिखते: पात्रों के चेहरे के भाव और शारीरिक गतिविधियाँ सीधे दिखाई नहीं जा सकतीं।
  3. परिवेश का वर्णन कठिन: स्थान और वातावरण को केवल आवाज़ के माध्यम से स्पष्ट करना पड़ता है।
  4. पात्रों की पहचान: अलग-अलग पात्रों की पहचान उनकी आवाज़ और बोलने के ढंग से करानी पड़ती है।
  5. घटनाओं को समझाना: किसी घटना को दिखाने के बजाय संवाद और ध्वनि के माध्यम से उसका आभास कराना पड़ता है।

इन सीमाओं को कैसे पूरा किया जा सकता है?

  1. संवाद: प्रभावशाली और स्वाभाविक संवादों के द्वारा कहानी को आगे बढ़ाया जाता है।
  2. ध्वनि-प्रभाव: दरवाज़ा खुलने, कदमों की आहट, बारिश, वाहन आदि की ध्वनियों से घटनाओं और स्थान का आभास कराया जाता है।
  3. पार्श्व संगीत: संगीत के माध्यम से वातावरण, भावनाओं और तनाव को प्रभावशाली बनाया जाता है।
  4. आवाज़ का उतार-चढ़ाव: पात्रों की आवाज़ में बदलाव करके उनके भाव, उम्र और मनःस्थिति को स्पष्ट किया जाता है।
  5. मौन का प्रयोग: उचित स्थान पर मौन का प्रयोग करके तनाव, दुख, आश्चर्य या गंभीरता को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सकता है।
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पाठ 12: कैसे बनता है रेडियो नाटक - पाठ से संवाद [पृष्ठ १५४]

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एनसीईआरटी Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
पाठ 12 कैसे बनता है रेडियो नाटक
पाठ से संवाद | Q 1. | पृष्ठ १५४
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