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भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?

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प्रश्न

भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

भक्तिन का मानना था कि शास्त्रों में “तीरथ गए मुंडाए सिद्ध” कहा गया है, इसलिए सिर मुंडवाना एक उचित और धार्मिक कार्य है। वह इस कथन की व्याख्या अपने दृष्टिकोण से करते हुए सिर मुंडवाने को शास्त्रसम्मत सिद्ध करने का प्रयास करती थी। यद्यपि लेखिका को भक्तिन का बार-बार सिर मुंडवाना पसंद नहीं था और वे उसे ऐसा करने से रोकती थीं, फिर भी भक्तिन अपने निर्णय को धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में वर्णित बातों का आधार देकर उचित ठहराती थी।

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भक्तिन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 10: महादेवी वर्मा (भक्तिन) - अभ्यास [पृष्ठ ७३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 Class 12
पाठ 10 महादेवी वर्मा (भक्तिन)
अभ्यास | Q 5. | पृष्ठ ७३

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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए:

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महादेवी जी इस पाठ में हिरनी सोना, कुत्ता बसंत, बिल्ली गोधूलि आदि के माध्यम से पशु- पक्षी को मानवीय संवेदना से उकेरने वाली लेखिका के रूप में उभरती हैं। उन्होंने अपने घर में और भी कई पशु-पक्षी पाल रखे थे तथा उन पर रेखाचित्र भी लिखे हैं। शिक्षक की सहायता से उन्हें ढूँढ़कर पढ़ें। जो मेरा परिवार नाम से प्रकाशित है।

नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-

पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले


नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-

खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी


नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-

अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण


‘बहनोई’ शब्द ‘बहन (स्त्री.) + ओई’ से बना है। इस शब्द में हिंदी भाषा की एक अनन्य विशेषता प्रकट हुई है। पुंलिंग शब्दों में कुछ स्त्री-प्रत्यय जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द बनाने की एक समान प्रकिया कई भाषाओं में दिखती है, पर स्त्रीलिंग शब्द में कुछ पुं. प्रत्यय जोड़कर पुंलिंग शब्द बनाने की घटना प्रायः अन्य भाषाओं में दिखलाई नहीं पड़ती है। यहाँ पुं. प्रत्यय ‘ओई’ हिंदी की अपनी विशेषता है। ऐसे कुछ और शब्द उनमें लगे पुं. प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।

पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए।

ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।


भक्तिन पाठ में पहली कन्या के दो संस्करण जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इनमें किन तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है? इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?

  1. अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।
  2. घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज़्यादा फ़ाउल मारा तो रेड कार्ड दिखा के हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूँगा।
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