मराठी

भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ ........... एक मामूली धोखेबाज़ - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ ........... एक मामूली धोखेबाज़

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

भाव यह है कि भ्रष्ट लोगों को देखकर भी कवि कुछ नहीं कर पाता इसलिए वह स्वयं को लाचार मानता है। परन्तु यदि प्रयास करता तो शायद कुछ बदलाव हो सकता था। यही कारण है कि वह स्वयं को कामचोर कहने से नहीं हिचकिचाता। ईमानदार लोगों की दशा को अनदेखा करने के कारण स्वयं को धोखेबाज़ भी कह डालता है। लोगों के भ्रष्ट व्यवहार ने उसके हाथ बाँध दिए हैं। वह अपने सम्मुख एक ईमानदार व्यक्ति को हाथ फैलाते देखता है परन्तु हालात उसे विवश कर देते हैं। वह उसकी ऐसी दशा देखकर भी चुप है। यही कारण है कि वह स्वयं को इस प्रकार के नामों से पुकारता है।

shaalaa.com
एक कम
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

संबंधित प्रश्‍न

कवि ने लोगों के आत्मनिर्भर, मालामाल और गतिशील होने के लिए किन तरीकों की ओर संकेत किया है? अपने शब्दों में लिखिए।


हाथ फैलाने वाले व्यक्ति को कवि ने ईमानदार क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।


'मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?


भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
1947 के बाद से ........... गतिशील होते देखा है


भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
तुम्हारे सामने बिलकुल ............ लिया है हर होड़ से


शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
कि अब जब कोई ............. या बच्चा खड़ा है।


शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी ............... निश्चिंत रह सकते हैं।


1947 से लोग अनेक तरीके से मालामाल हुए किन्तु विमुद्रिकरण होने से उन स्थितियों में बदलाव आया या नहीं?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×