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भारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।

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प्रश्न

भारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का व्यापक रूप से निम्नीकरण हुआ है। भारत की नदियों, नहरों, झीलों व तालाबों आदि का जल अनेक कारणों से उपयोग हेतु शुद्ध नहीं रह गया है। इसमें अल्पमात्रा में निलंबित कण, कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थ समाहित होते हैं। जल में जब इन पदार्थों की मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाती है तो जल प्रदूषित हो जाता है और जल में स्वतः शुद्धीकरण की क्षमता इसे शुद्ध नहीं कर पाती। ऐसा जल मानव व जीवों के उपयोग के योग्य नहीं रह जाता।प्रदूषण के स्रोत – उत्पादन प्रक्रिया में लगे उद्योग अनेक अवांछित उत्पाद पैदा करते हैं। इनमें औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली गैसे, रासायनिक अवशेष, अनेक भारी धातुएँ, धूल कण व धुआँ शामिल होता है। अधिकतर औद्योगिक कचरे को बहते हुए जल में व झीलों आदि में विसर्जित कर दिया जाता है। इस तरह विषाक्त रासायनिक तत्व जलाशयों, नदियों व अन्य जल भंडारों तक पहुँच जाते हैं जो इन जलस्रोतों में पनपने वाली जैव प्रणाली को नष्ट कर देते हैं।
सर्वाधिक जलप्रदूषक उद्योगों में, चमड़ा, लुगदी व कागज, वस्त्र तथा रसायन उद्योग हैं। आधुनिक कृषि में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग होता है जिनमें अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवार नाशक आदि भी प्रदूषण उत्पन्न करने वाले घटक हैं। ये रसायन वर्षा जल के साथ अथवी सिंचाई जल के साथ बहकर नदियों, झीलों व तालाबों में चले जाते हैं तथा धीरे-धीरे जमीन में स्रवित होकर भू-जल तक पहुँच जाते हैं। भारत में तीर्थयात्राओं, धार्मिक क्रियाकलापों, पर्यटन व सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जल प्रदूषित होता है। भारत में धरातलीय जल के लगभग सभी स्रोत संदूषित हो चुके हैं जो मानव उपयोग के योग्य नहीं रह गए हैं।

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पर्यावरण प्रदूषण
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पाठ 9: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ - अभ्यास [पृष्ठ १४३]

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एनसीईआरटी Bhugol Bharat Log aur Arthvyavastha [Hindi] Class 12
पाठ 9 भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ
अभ्यास | Q 3. (i) | पृष्ठ १४३
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