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भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

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प्रश्न

भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

भारतीय नगरों में एक ओर सुविकसित नगरीय संरचना है तो दूसरे सिरे पर झुग्गी-बस्तियाँ, गंदी बस्तियाँ, झोंपड़पट्टी तथा पटरियों के किनारे बने ढाँचे खड़े हैं। इनमें वे लोग रहते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में आजीविका के लिए प्रवासित होने के लिए मजबूर हुए हैं और जमीन की ऊँची कीमत के कारण अथवा ऊँचे किराए के कारण अच्छे आवासों में चाहते हुए भी नहीं रह पाते हैं तथा पर्यावरणीय दृष्टि से निम्नीकृत भूमि पर कब्जा कर रहने लगते हैं। गंदी बस्तियाँ न्यूनतम वांछित आवासीय क्षेत्र होते हैं जहाँ जीर्ण-शीर्ण मकान, स्वास्थ्य की निम्न सुविधाएँ, खुली हवा का अभाव, पेयजल, प्रकाश तथा शौच जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव पाया जाता है। ये क्षेत्र अधिक भीड़भाड़ वाले, पतली-सँकरी गलियों तथा आग लगने की उच्च संभावना वाले जोखिमों से परिपूर्ण होते हैं।
गंदी बस्तियों की अधिकांश जनसंख्या नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन पर अधिक जोखिमपूर्ण कार्य करती है। अतः ये लोग अल्पपोषित होते हैं। इन्हें विभिन्न रोगों और बीमारियों की संभावना बनी रहती है।
ये लोग अपने बच्चों के लिए उचित शिक्षा का खर्च भी वहन नहीं कर सकते हैं। गरीबी उन्हें नशीली दवाओं/पदार्थों को सेवन करने, अपराध, गुंडागर्दी, पलायन, उदासीनता तथा अंततः सामाजिक बहिष्कार की ओर उन्मुख करती है।

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गंदी बस्तियों की समस्याएँ
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पाठ 9: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ - अभ्यास [पृष्ठ १४३]

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एनसीईआरटी Bhugol Bharat Log aur Arthvyavastha [Hindi] Class 12
पाठ 9 भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ
अभ्यास | Q 3. (ii) | पृष्ठ १४३
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