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प्रश्न
'बड़े भाई साहब' कहानी के अंत में बड़े भाई साहब पतंग की डोर थामे हॉस्टेल की ओर भागे जाते हैं। उनका इस तरह से दौड़े जाना क्या सिद्ध करता है? स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
'बड़े भाई साहब' कहानी के अंत में बड़े भाई साहब पतंग की डोर थामे होस्टल की ओर भागे जाते हैं। यह मन में दबी उनकी इच्छाओं को प्रकट करता है। बड़े भाई साहब को हमेशा से अनुशासनप्रिय, जिम्मेदार और पढ़ाई को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य मानने वाला व्यक्ति दिखाया गया है। वे अपने छोटे भाई पर भी यही अनुशासन और नियम थोपने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे पढ़ाई को जीवन की सफलता का मुख्य माध्यम मानते हैं।
पद तथा जिम्मेदारियाँ भले ही उन्हें अपने छोटे भाई से बड़ा बनाए हुए हो परंतु बचपन की वो उम्र समय आने पर उनकी दबी इच्छाओं को रोक नहीं पाती। उनका मन भी सामान्य बच्चों की तरह खेलने का होता था। इस दौड़ने से यह भी सिद्ध होता है कि बड़े भाई साहब भी अपनी उम्र और बचपन की ख्वाहिशों से अछूते नहीं हैं। वे भी पतंगबाजी और खेल के प्रति उत्सुक हैं, लेकिन अपनी बड़ी जिम्मेदारियों और अनुशासन के चलते इसे व्यक्त नहीं कर पाते।
बड़े भाई साहब बड़े होने के नाते यही चाहते और कोशिश करते थे कि वे जो कुछ भी करें, वह छोटे भाई के लिए एक उदाहरण का काम करे। उन्हें अपने नैतिक कर्तव्य का बोध था कि स्वयं अनुशासित रहकर ही वे भाई को अनुशासन में रख पाएँगे। इस आदर्श तथा गरिमामयी स्थिति को बनाए रखने के लिए उन्हें अपने मन की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।
