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'कर चले हम फिदा' कविता से उद्धृत 'तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि सैनिक देशवासियों से क्या अपेक्षा रखता है? - Hindi Course - B

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प्रश्न

'कर चले हम फिदा' कविता से उद्धृत 'तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि सैनिक देशवासियों से क्या अपेक्षा रखता है?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

इस कविता में कवि ने बलिदानी सैनिकों के मन की इच्छा को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। शहीद सैनिक चाहते हैं कि हम बलिदान की राह को सूना न होने दें वरन्‌ काफिला बनाकर उसमें शामिल होते रहें। सैनिक अपेक्षा करते हैं कि जो भी हाथ हमारी भारतमाता की ओर उठे हम उसे काट दें। सैनिक देशवासियों से यह अपेक्षा करता है कि वे देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमेशा सतर्क रहें। सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा की है, और अब वे चाहते हैं कि देशवासी भी उसी दृढ़ता और साहस के साथ देश की रक्षा करें। यद्यपि आज का मनुष्य स्वकेन्द्रित होता जा रहा है लेकिन जब-जब देश पर कोई संकट आता है तब-तब वह सभी भेदभाव और आपसी मनमुटाव भुलाकर देश की रक्षा हेतु संगठित होकर जुट जाता है। 'तोड़ दो अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति का आशय है कि यदि किसी ने देश को हानि पहुँचाने का प्रयास किया तो उसे समाप्त कर देना ही उचित है अर्थात्‌ शत्रुओं को समाप्त कर देना चाहिए। सैनिक उम्मीद करते हैं कि देशवासी एकजुट रहें, देशभक्ति की भावना बनाए रखें, और देश की अखंडता को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करें।

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