Advertisements
Advertisements
प्रश्न
अगर तुम्हें घर में एक दिन के लिए सारे अधिकार दे दिए जाएँ तो तुम क्या-क्या करोगी?
Advertisements
उत्तर
- कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करूंगी।
- अपनी सहेलियों को बुलाकर उनसे गप्पे भारूंगी।
- दूध और फल बिल्कुल नहीं लूंगी।
- रसोइए से मनमानी चीजें बनवाकर खाऊँगी।
- नेट पर सर्किंग करूंगी।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
अब्बा ने क्या सोचकर कहानी की बात मान ली?
वह एक दिन बहुत अनोखा था जब बच्चों को बड़ों के अधिकार मिल गए थे। वह दिन बीत जाने पर इन्होंने क्या सोचा होगा-
दादी ने
"दोनों घंटों बैठकर इन पाबंदियों से बच निकलने की तरकीबें सोचा करते थे।"
कौन-सी तरकीब से उनकी इच्छा पूरी हो गई थी?
क्या तुम उन दोनों को इस तरकीब से भी अच्छी तरकीब सुझा सकती हो?
“… आज तो उनके सारे अधिकार छीने जा चुके हैं।”
उन्होंने अम्मी के कौन-कौन से अधिकार छीने होंगे?
‘बादशाहत’ क्या होती है? चर्चा करो।
कहानी में उस दिन बच्चों को सारे बड़ों वाले काम करने पड़े थे। ऐसे में कौन एक दिन का असली ‘बादशाह’ बन गया था?
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
इन चीज़ों के अलावा और किन-किन चीज़ों को ‘तर माल’ कहा जा सकता है?
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
इन चीज़ों को तुम क्या नाम देना चाहोगी? सुझाओ।
"बिल्कुल इसी तरह तो वह आरिफ़ और सलीम से उनकी मनपसंद कमीज़ उतरवा कर निहायत बेकार कपड़े पहनने का हुक्म लगाया करती हैं।"
तुम्हें भी अपना कोई खास कपड़ा सबसे अच्छा लगता होगा। उस कपड़े के बारे में बताओ। वह तुम्हें सबसे अच्छा क्यों लगता है?
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
पहनने की चीजें
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
करने के काम
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
खेल
'भारी' की तरह हल्का का भी अलग-अलग अर्थों में इस्तेमाल करो।
