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प्रश्न
अधोलिखितवाक्यम् रेखाङ्कितपद प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थं चित्वा लिखत।
वासव! अहं पुत्रस्य दैन्यं दृष्टवा रोदिमि।
पर्याय
पुत्र!
इन्द्र!
गणेश!
शिव!
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उत्तर
इन्द्र!
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वृषभः दीनः इति जानन्नपि कः तं नुद्यामान् आसीत्?
दुर्बले सुते कस्याः अधिका कृपा भवति?
कयोः एकः शरीरेण दुर्बलः आसीत्?
चण्डवातेन मेघरवैश्च सह कः समजायत?
सुरभिः इन्द्रस्य प्रश्नस्य किमुत्तर ददाति?
मातुः अधिका कृपा कस्मिन् भवति?
पाठेऽस्मिन् कयोः संवादः विद्यते?
‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तैः समानार्थकपदौः कुरुत-
| क स्तम्भ | ख स्तम्भ | ||
| (क) | कृच्छ्रेण | (i) | वृषभः |
| (ख) | चक्षुभ्या॑म | (ii) | वासवः |
| (ग) | जवने | (iii) | नेत्राभ्याम् |
| (घ) | इन्द्रः | (iv) | अचिरम् |
| (ङ) | पुत्राः | (v) | द्रुतगत्या |
| (च) | शीघ्रम् | (vi) | काठिन्येन |
| (छ) | बलीवर्दः | (vii) | सुताः |
स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
सः कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति।
स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
धेनूनाम् माता सुरभिः आसीत्?
स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा दु:खी आसीत्।
रेखांकितपदे यथास्थानं सन्धि विच्छेद वा कुरुत-
कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् + आसीत्।
रेखांकितपदे यथास्थानं सन्धि विच्छेद वा कुरुत-
तयोरेक: वृषभः दुर्बलः आसीत्।
रेखांकितपदे यथास्थानं सन्धि विच्छेद वा कुरुत-
सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम्?
रेखांकितपदे यथास्थानं सन्धि विच्छेद वा कुरुत-
तथा + अपि + अहम् + एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि।
‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं लिखितम्, ‘ख’ स्तम्भे पुनः विशेष्यपदम्। तयोः मेलनं कुरुत-
| क स्तम्भ | ख स्तम्भ | ||
| (क) | कश्चित् | (i) | वृषभम् |
| (ख) | दुर्बलम् | (ii) | कृपा |
| (ग) | क्रुद्धः | (iii) | कृषीवल: |
| (घ) | सहस्राधिकेषु | (iv) | आखण्डल: |
| (ङ) | अभ्यधिका | (v) | जननी |
| (च) | विस्मितः | (vi) | पुत्रेषु |
| (छ) | तुल्यवत्सला | (vii) | कृषक: |
