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प्रश्न
अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
- पहले उत्तर का कारण: कविता की पंक्ति उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं से साफ़ पता चलता है कि पक्षियों के जीवन में लोभ और पाप नहीं है। वे श्रम से जो मिलता है, उतना ही लेते हैं और बचा हुआ भाग औरों के हित में छोड़ देते हैं। जबकि प्रेम-प्रीति, मिल-जुलकर रहना और निर्भय विचरण कविता में पक्षियों के गुण बताए गए हैं। इसलिए 'लोभ और पाप' ही सही उत्तर है।
- दूसरे उत्तर का कारण: पक्षी सब मिल-जुलकर रहते और खाते हैं; उनमें कोई भेदभाव या ऊँच-नीच नहीं है। एक साथ रहने और बराबरी से खाने का यही भाव समानता और एकता है। असमानता, प्रतिस्पर्धा, स्वार्थ या ईर्ष्या तो मनुष्यों में पाए जाते हैं, पक्षियों में नहीं। इसलिए 'समानता और एकता' ही सही उत्तर है।
- तीसरे उत्तर का कारण: पक्षी कहते हैं, हम स्वच्छंद क्यों नहीं, तुमने डाली है बेड़ी पग में? इसका अर्थ है कि पक्षी मनुष्य को उनकी तरह बिना बंधन के, स्वतंत्र रहकर जीवन जीने की सीख देते हैं। वे मनुष्य से कहते हैं कि वह अपनी 'सोने की कड़ियाँ' (भौतिक बंधन) तोड़ दे और मानवता से द्रोह-भावना छोड़ दे। इसलिए स्वच्छंद रहना ही सही उत्तर है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
