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आज़ादी के समय देश के पूर्वी और पशिचमी इलाकों में राष्ट्र - निर्माण की चुनौती के लिहाज से दो मुख्य क्या अंतर थें? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

आज़ादी के समय देश के पूर्वी और पशिचमी इलाकों में राष्ट्र - निर्माण की चुनौती के लिहाज से दो मुख्य क्या अंतर थें?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

आजादी के समय देश के पूर्वी और पशिचमी इलाको में राष्ट्र - निर्माण की चुनौती के लिहाज से दो मुख्य अंतर निम्न थे -

  1. विभाजन से पहले यह तय किया गया की धार्मिक बहुसंख्या को विभाजन का आधार बनाया जायेगा। इसके मायने यह थे की जिन इलाकों में मुसलमान बहुसंख्यक थे वे इलाके 'पाकिस्तान' के भू - भाग होंगे और शेष हिस्से 'भारत' कहलाएंगे। यह बात थोड़ी आसान जान पड़ती है परन्तु असल में इसमें कई किस्म की दिक्क्तें थीं। पहली बात तो यह की 'ब्रिटिश इण्डिया' में कोई एक भी इलाका ऐसा नहीं था, जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक थे। ऐसे दो इलाके थे जहां मुसलमानों की आबादी अधिक अधिक थी। एक इलाका पशिचम में था तो दूसरा इलाका पूर्व में। ऐसा कोई तरीका नहीं था की इन दोनों इलाकों को जोड़कर एक जगह कर दिया जाए। इसे देखते हुए फैसला हुआ की पाकिस्तान में दो इलाके शामिल होंगे यानी पशिचम में दो इलाके शामिल होंगे यानि पशिचमी पाकिस्तान और पूर्व पाकिस्तान बीच में भारतीय भू - भाग का एक बड़ा विस्तार रहेगा।
  2. एक समस्या और विकट थी। 'ब्रिटश इण्डिया' के मुस्लिम - बहुल प्रान्त पंजाब और बंगाल में अनेक हिस्से बहुसंख्या गैर मुस्लिम आबादी वाले थे। ऐसे में फैसला हुआ की इन दोनों प्रांतो में भी बँटवारा धार्मिक बहुसंख्यकों के आधार पर होगा और इसमें जिले अथवा उससे निचले स्तर के प्राशासनिक हल्के को आधार बनाया जाएगा। 14 - 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि तक यह फैसला नहीं हो पाया था। इसका मतलब यह हुआ की आजादी के दिन तक अनेक लोगों को यह पता नहीं था की वे भारत में हैं या पाकिस्तान में। पंजाब और बंगाल का बँटवारा विभाजन की सबसे बड़ी त्रासदी सावित हुआ।
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विभाजन - विस्थापन और पुनर्वास
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