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आशय स्पष्ट कीजिए - “बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।”

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प्रश्न

आशय स्पष्ट कीजिए -

“बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।”

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उत्तर

देशभक्त नेताओं ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपनी हर खुशी को त्याग दिया तथा अपना सर्वस्व देश के प्रति समर्पित कर दिया। आज हमारा देश उन्हीं के कारण आज़ाद हुआ है। परन्तु यदि किसी के मन में ऐसे देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना नहीं है, वे उनकी देशभक्ति पर हँसते हैं तो यह बड़े ही दु:ख की बात है। ऐसे लोग सिर्फ़ अपने बारे में सोचते हैं, इनके मन में स्वार्थ की भावना प्रबल है। लेखक ऐसे लोगों पर अपना क्षोभ व्यक्त करते हैं।

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नेताजी का चश्मा
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 10: स्वयं प्रकाश - नेताजी का चश्मा - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४८]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
पाठ 10 स्वयं प्रकाश - नेताजी का चश्मा
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ४८

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(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।

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(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।


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