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10 kg द्रव्यमान की कोई वृत्तीय चक्रिका अपने केंद्र से जुड़े किसी तार से लटकी है। चक्रिका को घूर्णन देकर तार में ऐंठन उत्पन्न करके मुक्त कर दिया जाता है। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

10 kg द्रव्यमान की कोई वृत्तीय चक्रिका अपने केंद्र से जुड़े किसी तार से लटकी है। चक्रिका को घूर्णन देकर तार में ऐंठन उत्पन्न करके मुक्त कर दिया जाता है। मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल 1.5 s है। चक्रिका की त्रिज्या 15 cm है। तार का मरोड़ी कमानी नियतांक ज्ञात कीजिए। [मरोड़ी कमानी नियतांक α संबंध J = -αθ द्वारा परिभाषित किया जाता है, यहाँ J प्रत्यानयन बल युग्म है तथा θ ऐंठन कोण है।

संख्यात्मक
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उत्तर

दिया है : चक्रिका का द्रव्यमान m = 10 kg, मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल T = 1.5 s,

चक्रिका की त्रिज्या = 0.15 m
केंद्र से जाने वाली तथा तेल के लंबवत् अक्ष के परितः चक्रिका का

जड़त्व - आघूर्ण `"I" = 1/2"mr"^2`

`= 1/2 xx 10  "kg"  xx (0.15  "m")^2`

= 0.1125 kg m2

माना तार का मरोड़ी का नियतांक C है।

माना किसी क्षण चक्रिका θ कोण से घूम चुकी है, तब तार में उत्पन्न प्रत्यानयन बल - युग्म J = C θ होगा, जो चक्रिका को वापस प्रारंभिक स्थिति में लाने का प्रयास करेगा। यदि इस क्षण चक्रिका का त्वरण α है तो J = - I α

∴ - I α = C θ      या      `alpha = - ("C"/"I") theta`

अतः त्वरण, विस्थापन θ के अनुक्रमानुपाती तथा विपरीत दिष्ट है ; अतः चक्रिका की गति सरल आवर्त है।

यहाँ   `("विस्थापन" (theta))/("त्वरण" (alpha)) = "I"/"C"`

∴ आवर्तकाल T = `2pi  sqrt("विस्थापन"/"त्वरण") = 2pisqrt("I"/"C")`

अतः  `"T"^2 = 4pi^2"I"/"C"`

`=>  "C" = (4pi^2"I")/"T"^2`

` = (4 xx (3.14)^2 xx 0.1125)/(1.5 xx 1.5)`

= 1.97 N m/rad

अतः मरोड़ी नियतांक  C = 2.0 N m/rad

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सरल आवर्त गति के लिए बल का नियम
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