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SSC (Hindi Medium) १० वीं कक्षा - Maharashtra State Board Question Bank Solutions for Hindi [हिंदी]

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Hindi [हिंदी]
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प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए : 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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जोड़ियाँ मिलाइए :

उत्‍तर
१. धुँधला लाल ______ १. अँगोछा
२. खोमचेवाला ______ २. खनखनाहट
३. मुरादाबादी ______ ३. प्रकाश
४. रुपये ______ ४. साैदा
५. माँ ______ ५. चौका-बर्तन
६. मैली-सी ______ ६. थाली
    ७. धोती
[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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सही घटनाक्रम लगाकर वाक्‍य फिर से लिखिए : 

१. बेटा तुरंत की कमाई से पुलकित हो रहा था। 

२. उसने जेब से एक रुपया निकालकर लड़के की थाली में डाल दिया। 

३. एक मिनट गुजारना मुश्किल हो जाता है। 

४. व्याकुलता कुछ कम हुई।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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कारण लिखिए :

बच्चे ने अनिच्छा से रोटी माँ की ओर बढ़ाई ______ 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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कारण लिखिए :

मनुष्‍य का मन अनासक्‍त हो जाता है ______ 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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कारण लिखिए :

दिलीप साइकिल पर बिना बैठे चलने लगा ______

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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कारण लिखिए :

दिलीप खोमचेवाले के साथ उसके घर गया ______

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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गली के मुख पर कमेटी की बिजली का ______ जल रहा था।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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रुपया हाथ में ले माँ ने ______ से पूछा। 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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रहने दो कोई ______ नहीं फिर आ जाएगा। 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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उसने ______ खोमचेवाले से सौदा खरीद कर खाया था।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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बढ़ता हुआ प्रदूषण और उसकी रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपाय लिखिए ।

[4] उपयोगित लेखन (रचना विभाग)
Chapter: [4] उपयोगित लेखन (रचना विभाग)
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‘गरीबी उन्नति में बाधा नहीं बनती’, विषय पर अपने विचार लिखिए।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

      परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है - ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता है। परोपकार ही मानव को पशुता से सदय बनाता है। वस्तुतः निस्स्वार्थ भावना से दूसरों का हित साधन ही परोपकार है। मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार कर सकता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति करना ही परोपकार है और सहानुभूति किसी भी रूप में प्रकट की जा सकती है। किसी निर्धन की आर्थिक सहायता करना अथवा किसी असहाय की रक्षा करना परोपकार के रूप हैं। किसी पागल अथवा रोगी की सेवा-शुश्रूषा करना अथवा किसी भूखे को अन्नदान करना भी परोपकार है। किसी को संकट से बचा लेना, किसी को कुमार्ग से हटा देना, किसी दुखी-निराश को सांत्वना देना-ये सब परोपकार के ही रूप हैं। कोई भी कार्य, जिससे किसी को लाभ पहॅुंचता है, परोपकार है, जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न रूपों में किया जा सकता है।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए :

 

(२) ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे’ इस पंक्ति का तात्पर्य लिखिए। 

(३)

१. वचन परिवर्तन कीजिए :
१. चिंता - ______
२. भूखे - ______

२. निम्न शब्दों के लिंग पहचानिएः
१. सामर्थ्य - ______
२. परोपकार - ______

(४) ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ पर अपने विचार लिखिए ।

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे 'घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है। ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घरपहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खातेऔर पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने'तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखतीथीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रातहमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

  1. कृति पूर्ण कीजिए:   [2]
  2. उत्तर लिखिए:     [2]
    1. बुआ जी की आत्मा बसंती थी - __________
    2. आने वाली महिला की तबीयत थी - __________
    3. बुआ जी खयाल रखती थीं - ____________
    4. अतिथि लेखक के घर रहे - __________
  3. 'संयुक्त परिवार' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।     [3]
[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं।

(1) लिखिए:  (2)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

____________
____________
____________
____________

(2) लिखिए:

(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए :   (1)

  1. हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
  2. अनायास ही ताव में आने वाला - ____________

(ii) विशेषता लिखिए :  (1)

  1. बिजली - ______
  2. बादल - ______

(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (3)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

(2) लिखिए -  (2)

बैल को देखकर समझू ने यह किया :

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रामनाम जपिब श्रवननि सुनिबौ।
सलिल मोह में बहि नहीं जाईबौ।। टेक ।।
अकथ कथ्यौ न जाइ।
कागद लिख्यौ न माइ।।
सकल भुवनपति मिल्यौ है सहज भाइ ।। १।।
राम माता, राम पिता, राम सबै जीव दाता।
भणत नामईयौ छीपै।
कहै रे पुकारि गीता ।।२।।

(1) आकृति पूर्ण कीजिए :  (2)

(i) 

(ii)

(2) निम्नलिखित शब्दों के लिए समानार्थी शब्द पट्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए:  (2)

  1. कानों से = ______
  2. लालच = ______
  3. न कहने योग्य = ______
  4. कागज = ______

(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
Chapter: [2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
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निम्नलिखित मुदूदों के आधार पर पद्यविश्लेघषण कीजिए :

'मेरी स्मृति' अथवा 'चिंता' मुद्दे:

  1. रचनाकार का नाम
  2. रचना की विधा
  3. पसंद की पंक्तियाँ
  4. पंक्तियाँ पसंद होने के कारण
  5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा।
[1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
Chapter: [1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दिल के सूरज को, सलीबों पे चढ़ाने वालो।
रात ढल जाएगी, इक रोज जमाने वालो।

में तो खुशबू हूँ, किसी फूल में बस जाऊँगा,
तुम कहाँ जाओगे, कॉँटों के बिछाने वालो।

मैं उसूलों के उजालों में रहा करता हैँ,
सोच लों मेरी तरफ लौट के आने वालो।

उँगलियाँ तुमपे उठाएगी ये दुनिया इक दिन,
अपने 'बेदिल' से नजर फेर के जाने वालो।

(1) जोड़ियाँ मिलाकर फिर से लिखिए :  (2)

'अ' 'आ'
(i) दिल का सूरज (अ) बेदिल से
(ii) खुशबू बसेगी (ब) उसूलों के
(iii) उजालों में रहना (क) फूल में
(iv) नजर फेर लेना (ड) सलीबों पे चढ़ेगा

(2) 'बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा न कोय' इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[1.12] गजलें (पूरक पठन)
Chapter: [1.12] गजलें (पूरक पठन)
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