हिंदी

Science (English Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
[object Object]
[object Object]
विषयों
मुख्य विषय
अध्याय

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  8681 to 8700 of 25828  next > 

इस कविता में बादल के लिए ऐ विप्लव के वीर!, ऐ जीवन के पारावार! जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग कविता के शेष पाँच खड़ों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। जैसे- अरे वर्ष के हर्ष!, मेरे पागल बादल!, ऐ निर्बंध!, ऐ स्वच्छंद!, ऐ उद्दाम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार!, उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?

[1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Concept: undefined >> undefined
कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।
[1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। सुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

[1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [1.07] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Concept: undefined >> undefined

कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined

तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/ काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined

धूत कहौ ______ वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined

व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined

व्याख्या करें-
ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।

[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined
पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined
तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined
यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।
[1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [1.08] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Concept: undefined >> undefined
शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?
[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Concept: undefined >> undefined

गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।

[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Concept: undefined >> undefined

सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व।

[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Concept: undefined >> undefined
इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।
[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Concept: undefined >> undefined
कविता में एक भाव, एक विचार होते हुए भी उसका अंदाज़े बयाँ या भाषा के साथ उसका बर्ताव अलग-अलग रूप में अभिव्यक्ति पाता है। इस बात को ध्यान रखते हुए नीचे दी गई कविताओं को पढ़िए और दी गई फ़िराक की गज़ल-रुबाई में से समानार्थी पंक्तियाँ ढूँढ़िए।
(क) मैया मैं तो चंद्र खिलौनो लैहों।
सूरदास 
(ख) वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
उमड़ कर आँखों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान
सुमित्रानंदन पंत 
(ग) सीस उतारे भुईं धरे तब मिलिहैं करतार
कबीर 
[1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Chapter: [1.09] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ, गज़ल
Concept: undefined >> undefined

छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?

[1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Concept: undefined >> undefined

रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?

[1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Concept: undefined >> undefined

‘रस का अक्षयपात्र’ से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की और इंगित किया है?

[1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Concept: undefined >> undefined

व्याख्या करें-
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

[1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [1.1] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Concept: undefined >> undefined
< prev  8681 to 8700 of 25828  next > 
Advertisements
Advertisements
CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Question Bank Solutions
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Biology
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Chemistry
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Computer Science (C++)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Computer Science (Python)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ English Core
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ English Elective - NCERT
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Entrepreneurship
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Geography
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Hindi (Core)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Hindi (Elective)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ History
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Informatics Practices
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Mathematics
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Physical Education
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Physics
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Political Science
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Psychology
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Sanskrit (Core)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Sanskrit (Elective)
Question Bank Solutions for CBSE Science (English Medium) कक्षा १२ Sociology
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×