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Science (English Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions

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'छप्पन के काल ने देशभर में हाय-हाय मचाई हो लेकिन मालवा में लोग न प्यासे मरे न भूखे क्योंकि उसके पहले के साल खूब पानी था और बाद के साल में भी अपने नदी, नाले, तालाब सँभाल के रखो तो दुष्काल का साल मजे में निकल जाता है। लेकिन हम जिसे विकास की औद्योगिक सभ्यता कहते हैं वह उजाड़ की अपसभ्यता है।'

लेखक को क्यों लगता है कि हम जिसे विकास की औद्योगिक सभ्यता कहते हैं वह उजाड़ की अपसभ्यता है। आप क्या मानते हैं? कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

[3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
Chapter: [3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
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शरद में ही हरसिंगार फूलता है। पितर-पक्ख (पितृपक्ष) में मालिन दाई घर के दरवाजे पर हरसिंगार की राशि रख जाती थीं, तो खड़ी बोली हुई। गाँव की बोली में 'कुरइ जात रहीं।' बहुत ढेर सारे फूल मानो इकट्ठे ही अनायास उनसे गिर पड़ते थे। 'कुरइ देना' है तो सकर्मक लेकिन सहजता अकर्मक की है।

उपर्युक्त पंक्तियाँ किसकी आत्मकथा का वर्णन कर रही हैं और इस कथा के केंद्र में क्या है?

[2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
Chapter: [2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

संस्कृति और सभ्यता ये दो शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है, जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति वह गुण है, जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है और करुणा, प्रेम एवं परोपकार सीखता है। आज रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक ये सभी सभ्यता की पहचान हैं और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है, उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर संस्कृति इन सबसे कहीं बारीक चीज़ है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है। मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है। संस्कृति धन नहीं, गुण है। संस्कृति ठाठ-बाट नहीं, विनय और विनम्रता है। एक कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है, लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हममें छिपा हुआ है। हमारे पास घर होता है, कपड़े होते हैं, मगर ये सारी चीज़ें हमारी सभ्यता के सबूत हैं, जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महीन चीज़ है और वह हमारी हर पसंद, हर आदत में छिपी रहती है। मकान बनाना सभ्यता का काम है। लेकिन हम मकान का कौन-सा नक्शा पसंद करते हैं यह हमारी संस्कृति बतलाती है। आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर ये छह विकार प्रकृति के दिए हुए हैं। परंतु अगर ये विकार बेरोक-टोक छोड़ दिए जाएँ तो आदमी इतना गिर जाए कि उसमें और जानवर में कोई भेद नहीं रह जाएगा। इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है। इन दुर्गणों पर जो आदमी जितना ज्यादा काबू कर पाता है, उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से बढ़ती है। जब दो देशों या जातियों के लोग आपस में मिलते हैं, तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसलिए संस्कृति की दृष्टि से वह जाति या वह देश बहुत ही धनी समझा जाता है, जिसने ज़्यादा-से-ज़्यादा देशों या जातियों की संस्कृतियों से लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो।

(1) गद्यांश में ‘सभ्यता को बाहरी तरक्की’ बताया गया है क्योंकि यह - (1)

(क) इच्छापूर्ति में सक्षम है।
(ख) भौतिक साधनों की द्योतक है।
(ग) संस्कृति से भिन्न पहचान लिए है।
(घ) करुणा, प्रेम एवं परोपकार सिखाती है।

(2) सभ्यता और संस्कृति का मूलभूत अंतर क्रमशः है - (1)

(क) रेलगाड़ी, विनय
(ख) प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष
(ग) बाहरी तरक्की, भीतरी द्वंद्व
(घ) रिवाज़, सीख

(3) संस्कृति को ‘महीन चीज़’ कहने से लेखक सिद्ध करना चाहते हैं कि संस्कृति है - (1)

(क) अत्यंत तुच्छ
(ख) अति महत्वहीन
(ग) अत्यधिक उपयोगी
(घ) अति सर्वश्रेष्ठ

(4) निम्नलिखित वाक्यों में से सभ्यता के संदर्भ मैं कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) सभ्यता मनुष्य के स्वाधीन चिंतन की गाथा है।
(ख) सभ्यता मानव के विकास का विधायक गुण है।
(ग) सभ्यता मानव को कलाकार बना देती है।
(घ) सभ्यता संस्कृति से अधिक महत्वपूर्ण है।

(5) संस्कृति की प्रवृत्ति है - (1)

(क) आदाय-प्रदाय
(ख) आदाय-प्राप्ति
(ग) क्रय-विक्रय
(घ) आबाद-बर्बाद

(6) ‘मकान के लिए नक्शा पसंद करना हमारी संस्कृति का परिचायक है।’ ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि - (1)

(क) घर हमारी सभ्यता की पहचान है।
(ख) अन्य लोगों से जोड़ने का माध्यम है।
(ग) नक्शे के बिना मकान बनाना कठिन है।
(घ) हमारी सोच-समझ को उजागर करता है।

(7) अन्य संस्कृतियों का लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास करना दर्शाता है - (1)

(क) समरसता
(ख) संपूर्णता
(ग) सफलता
(घ) संपन्नता

(8) मनुष्य की मनुष्यता इसी बात में निहित है कि वह - (1)

(क) सभ्यता और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहे।
(ख) संस्कृति की समृद्धि के लिए कटिबद्धता बनाए रहे।
(ग) सभ्यता की ऊँचाई की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे।
(घ) मानसिक त्रुटियों पर नियंत्रण पाने के लिए चेष्टावान रहे।

(9) आदमी और जानवर का भेद समाप्त होना दर्शाता है - (1)

(क) सामाजिक असमानता
(ख) चारित्रिक पतन
(ग) सांप्रदायिक भेदभाव
(घ) अणुमात्रिक गिरावट

(10) सुसंस्कृत व्यक्ति से तात्पर्य है - (1)

(क) विकारग्रस्त व्यक्ति
(ख) विकासशील व्यक्ति
(ग) विचारशील व्यक्ति
(घ) विकारमुक्त व्यक्ति

[4] अपठित विभाग
Chapter: [4] अपठित विभाग
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राजप्पा नायडू ने एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के दफ़्तर में अपना आवेदन दिया। प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात उन्हें अलग डेस्क पर काम करने के लिए कहा गया। यह दर्शाता है कि वह हैं - 

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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विशेष लेखन की शब्दावली के उचित मिलान को दर्शाने वाले विकल्प का चयन कीजिए -

(I) पर्यावरण (i) रौंदा
(II) व्यापार (ii) सेंसेक्स
(III) खेल (iii) आर्द्रता
(IV) शेयर बाज़ार (iv) तेजड़िए
[3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
Chapter: [3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
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दिए गए कथनों में से अंशकालिक पत्रकार के लिए सही कथन का चयन कीजिए -

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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ड्राई एंकर वह होता है जो ______

[1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
Chapter: [1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
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एंकर बाइट कौन देता है?

[1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
Chapter: [1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए - 

भर जलद धरा को ज्यों अपार;
वे ही सुख-दुख में रहे न्यस्त,
तेरे हित सदा समस्त व्यस्त;
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से हिली, पली,
अंत भी उसी गोद में शरण
ली, मूँदे दृग वर महामरण!

मुझ भाग्यहीन की तू संबल
युग वर्ष बाद जब हुई विकल,
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी कर्म पर वज्रपात 
यदि धर्म, रहे नत सदा माथ।

(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)

(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश

(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)

(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह

(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

  1. कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
  2. पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
  3. सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -

(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)

(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)

(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)

(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था

(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)

(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है

[2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : सरोज स्मृति
Chapter: [2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : सरोज स्मृति
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बिस्कोहर की माटी पाठ के अनुसार निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -

  1. पाठ में मनुष्य के संबंधों की मार्मिक पड़ताल निहित है।
  2. जीवन की स्थितियाँ ऋतुओं के साथ बदलती हैं।
  3. प्रकृति के प्रकोप को ग्रामीण जीवन झेलता है।
  4. ग्रामीण जीवन में प्रकृति के प्रति अलगाव है।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -

[2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
Chapter: [2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
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विकास की औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता बन गई है। इसका कारण है -

[3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
Chapter: [3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए -

  1. भरभंडा : फूल
  2. डोंडहा : साँप
  3. कोइयाँ : जलपुष्प
  4. धामिन : अनाज

इन युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं -

[2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
Chapter: [2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
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अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है -

[1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
Chapter: [1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
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‘कोई भी तालाब अकेला नहीं है।’ यह कथन दर्शाता है -

[2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
Chapter: [2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
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‘कविता कोने में घात लगाए बैठी है। यह हमारे जीवन मैं किसी भी क्षण वसंत की तरह आ सकती है।’ इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

[4] कैसे बनती है कविता
Chapter: [4] कैसे बनती है कविता
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रंगमंच को प्रतिरोध का सशक्त माध्यम कहना कहाँ तक उचित है? तीन कारणों का उल्लेख कीजिए।

[5] नाटक लिखने का व्याकरण
Chapter: [5] नाटक लिखने का व्याकरण
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कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण कथानक की आवश्यकता के अनुसार प्रभावशाली ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाता है। किन्हीं दो तरीकों का वर्णन उदाहरण सहित दीजिए।

[6] कैसे लिखें कहानी
Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
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अधिकांश समाचार एक विशेष शैली में लिखे जाते हैं। इसका कारण बताते हुए शैली का विस्तृत परिचय दीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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अच्छे फीचर की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।

[9] घनानंद : कवित्त
Chapter: [9] घनानंद : कवित्त
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