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Arts (English Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions

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अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है -

[1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
Chapter: [1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
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‘कोई भी तालाब अकेला नहीं है।’ यह कथन दर्शाता है -

[2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
Chapter: [2] विश्वनाथ त्रिपाठी : बिस्कोहर की माटी
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‘कविता कोने में घात लगाए बैठी है। यह हमारे जीवन मैं किसी भी क्षण वसंत की तरह आ सकती है।’ इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

[4] कैसे बनती है कविता
Chapter: [4] कैसे बनती है कविता
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रंगमंच को प्रतिरोध का सशक्त माध्यम कहना कहाँ तक उचित है? तीन कारणों का उल्लेख कीजिए।

[5] नाटक लिखने का व्याकरण
Chapter: [5] नाटक लिखने का व्याकरण
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कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण कथानक की आवश्यकता के अनुसार प्रभावशाली ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाता है। किन्हीं दो तरीकों का वर्णन उदाहरण सहित दीजिए।

[6] कैसे लिखें कहानी
Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
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अधिकांश समाचार एक विशेष शैली में लिखे जाते हैं। इसका कारण बताते हुए शैली का विस्तृत परिचय दीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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अच्छे फीचर की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।

[9] घनानंद : कवित्त
Chapter: [9] घनानंद : कवित्त
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धरती का वातावरण गरम हो रहा है। कारण बताते हुए निवारण के उपाय भी बताइए।

[3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
Chapter: [3] प्रभाष जोशी : अपना मालवा-खाऊ-उजाडू सभ्यता में
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सूरदास कहाँ तो नैराश्य, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खा रहा था, कहाँ यह चेतावनी सुनते ही उसे ऐसा मालूम हुआ किसी ने उसका हाथ पकड़कर किनारे पर खड़ा कर दिया।

नकारात्मक मानवीय पहलुओं पर अकेले सूरदास का व्यक्तित्व भारी पड़ गया। जीवन मूल्यों की दृष्टि से इस कथन पर विचार कीजिए।

[1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
Chapter: [1] प्रेमचंद : सूरदास की झोपड़ी
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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥
सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा॥
बिन पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ ऐहि घाएँ॥
बहुरि निहारि निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू॥
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तापस तीछी॥

[6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
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विशेष लेखन के लिए सबसे जरूरी बात है -

[3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
Chapter: [3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
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रटंत या कुटेव को बुरी लत क्यों कहा गया है? नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन द्वारा इस लत से कैसे बचा जा सकता है?

[9] नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
Chapter: [9] नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
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समाचार लेखन की एक विशेष शैली होती है। इस शैली का नाम बताते हुए समाचार लेखन की इस शैली को स्पष्ट कीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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फीचर क्या है? फीचर को परिभाषित करते हुए अच्छे फीचर की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है।

भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं।

(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है?     (1)

  1. जीवन मूल्यों का महत्त्व
  2. ईश्वरीय सत्ता का योगदान
  3. राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
  4. त्याग का उदात्त रूप

(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है -   (1)

  1. संयम से
  2. अहिंसा से 
  3. मूल्यों से
  4. चिंतन से

(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______.    (1)

  1. सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
  2. सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
  3. सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
  4. सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता

(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है -   (1)

  1. भोगवाद से मुक्त होने के कारण
  2. भोगवाद से युक्त होने के कारण
  3. उदारता के कारण
  4. स्वार्थ भावना के कारण

(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है -    (1)

  1. समवयस्क
  2. सम्मानित
  3. सुसंस्कृत
  4. समावेशक

(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं -      (1)

  1. आधुनिकता
  2. भोगवादी दृष्टिकोण
  3. प्रकृति के प्रति उदासीनता
  4. लालची स्वभाव

(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए:  (1)

कथन -

  1. एक राष्ट्र की आत्मा
  2. जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
  3. पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
  4. आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन

विकल्प -

  1. कथन 1 व 4 सही है।
  2. कथन 1 व 2 सही है।
  3. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है -    (1)

  1. सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
  2. सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
  3. संस्कृति का हस्तांतरण करना
  4. संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना

(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है -    (1)

  1. ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
  2. विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
  3. आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
  4. आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से 

(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है -   (1)

  1. आत्मसंयम
  2. परोपकार
  3. त्याग की भावना
  4. जनप्रियता
[4] अपठित विभाग
Chapter: [4] अपठित विभाग
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किसी घटना की सूचना देने और उसके दृश्य दिखाने के साथ ही उस घटना के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों का कथन दिखा और सुनाकर खबर को प्रमाणिकता दी जाती है। इसे कहते हैं -

[3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
Chapter: [3] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
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फ़ीचर के संदर्भ में कौन- सा/से कथन सही हैं?

  1. फ़ीचर एक सुव्यवस्थित और आत्मनिष्ठ लेखन है।
  2. फ़ीचर में लेखक के पास अपनी राय ज़ाहिर करने का अवसर होता है।
  3. फ़ीचर लेखन में छह ककारों को सम्मिलित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
[1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
Chapter: [1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
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प्रो. स्वामी अय्यर एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और अपने खास वैचारिक रुझान के लिए जाने जाते हैं। उनकी अपनी एक लेखन शैली भी विकसित हो चुकी है। उनकी लोकप्रियता को देखकर अखबार ने उन्हें नियमित रूप से लिखने का ज़िम्मा दिया है। इस जानकारी के आधार पर वे लिखते होंगे -

[1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
Chapter: [1] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
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भुगतान के आधार पर अलग-अलग समाचार पत्रों एवं संगठनों में लिखने वाले पत्रकारों को कहते हैं -

[2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Chapter: [2] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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