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English Medium कक्षा १० - CBSE Question Bank Solutions for Hindi Course - A

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Hindi Course - A
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कवि के अनुसार फसल क्या है?

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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भाव स्पष्ट कीजिए -

(क) रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -

(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?

(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?

(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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‘फ़सल’ कविता हमें उपभोक्तावादी संस्कृति के दौर से कृषि संस्कृति की ओर ले जाती है। स्पष्ट कीजिए।

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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फ़सल उगाने में किसानों के योगदान को स्पष्ट कीजिए।

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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‘फ़सल’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

[1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
Chapter: [1.06] नागार्जुन : यह दंतुरित मुसकान और फसल
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कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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भाव स्पष्ट कीजिए -

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी’, से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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कवि ‘छाया’ छूने से क्यों मना करता है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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कवि के जीवन की कौन-सी यादें उसे दुखी कर रही हैं?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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‘भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण’ से कवि का क्या आशय है?

[1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
Chapter: [1.07] गिरिजकुमार माथुर : छाया मत छूना
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