हिंदी

उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी?

टिप्पणी लिखिए
Advertisements

उत्तर

बाजार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। लंबे समय तक उपभोक्ताओं का शोषण उत्पादकों तथा विक्रेताओं के द्वारा किया जाता रहा। इस शोषण से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार पर उपभोक्ता आंदोलनों के द्वारा दबाव डाला गया। यह वृहत् स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ और अनुचित व्यवसाय शैली को सुधारने के लिए व्यावसायिक कंपनियों और सरकार दोनों पर दबाव डालने में सफल हुआ। 1986 में भारत सरकार द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया। यह उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 कानून का बनना था, जो कोपरा (COPRA) के नाम से प्रसिद्ध है।

shaalaa.com
उपभोक्ता अधिकार
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 5: उपभोक्ता अधिकार - अभ्यास [पृष्ठ ८७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Samajik Vigyaan Aarthik Vikas ki Samajh [Hindi] Class 10
अध्याय 5 उपभोक्ता अधिकार
अभ्यास | Q 5. | पृष्ठ ८७

संबंधित प्रश्न

बाज़ार में नियमों तथा विनियमों की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कुछ उदाहरणों के द्वारा समझाएँ।


कुछ ऐसे कारकों की चर्चा करें, जिनसे उपभोक्ताओं का शोषण होता है।


मान लीजिए, आप शहद की एक बोतल और बिस्किट का एक पैकेट खरीदते हैं। खरीदते समय आप कौन-सा लोगो या शब्द चिह्न देखेंगे और क्यों?


उपभोक्ताओं के कुछ अधिकारों को बताएँ और प्रत्येक अधिकार पर कुछ पंक्तियाँ लिखें।


निम्नलिखित को सुमेलित करें

(1) एक उत्पाद के घटकों का विवरण (क)  सुरक्षा का अधिकार
(2) एगमार्क (ख)  उपभोक्ता मामलों में संबंध
(3) स्कूटर में खराब इंजन के कारण हुई दुर्घटना (ग)  अनाजों और खाद्य तेलों का प्रमाण
(4) जिला उपभोक्ता अदालत विकसित करने वाली एजेंसी (घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंर्तराष्ट्रीय संस्था
(5)  फूड फोर्टिफिकेशन (ङ)  सूचना का अधिकार ।
(6) उपभोक्ता इंटरनेशनल (च) वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक
(7)

भारतीय मानक ब्यूरो

(छ) खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना

भारत विश्व के उन देशों में से एक है, जिसके पास उपभोक्ताओं की समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट अदालते हैं।


जब उपभोक्ता को ऐसा लगे कि उसका शोषण हुआ है, तो उसे जिला उपभोक्ता अदालत में निश्चित रूप से मुकदमा दायर करना चाहिए।


जब अधिक मूल्य का नुकसान हो, तभी उपभोक्ता अदालत में जाना लाभप्रद होता है।


हॉलमार्क, आभूषणों की गुणवत्ता बनाए रखनेवाला प्रमाण-पत्र है।


उपभोक्ता को मुआवजा पाने का अधिकार है, जो क्षति की मात्रा पर निर्भर करती है।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×