Advertisements
Advertisements
प्रश्न
उचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत –
विद्यालस्य विद्यालयत्वं ______ भवति।
विकल्प
छात्रान्
छात्रैः
Advertisements
उत्तर
विद्यालस्य विद्यालयत्वं छात्रैः भवति।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ पृच्छन्ति।
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ वदतः
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ विकसन्ति
सार्थक पदं लिखत –
| कः | शि | क्ष |
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| वा | रः | न |
उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ च पश्यन्ति। (वृक्ष, पुष्प, बहुव.)
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
पुत्राश्च विविधैः शीलैंर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः।
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| निरधन | तृतीया | निर्धनेन | निर्धनभ्याम् | निर्धनैः |
| जन | ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकप्रदत्तपदैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
अद्य अधिकांशजनाः शिनवासरे ______ बहिः गच्छन्ति। (मनोरंजन)
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| लता | ||
| लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| शाखा | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| पत्त्रं | ||
| पत्राय | पत्रेभ्याम् | पत्रेभ्यः |
| फलम् | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| पत्त्रं | ||
| पत्राय | पत्रेभ्याम् | पत्रेभ्यः |
| पुष्पम् | ||
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कृषक : ______ सर्वत्र प्रसिद्धः अस्ति।
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| यथा- मित्रम् | पञ्चमी | मित्रम् | मित्राभ्याम् | मित्रेभ्यः |
| गात्रम् | ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ रक्षणाय वृक्षाणाम् आरोपणम् आवश्यकम्।
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुण:।
गुणास्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा।।
| ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
यथा-
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| वेद | ||
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
परोक्षे कार्यहन्तारम्,
प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्ययेत् तादृशं मित्रम्,
विषकुम्भं पयोमुखम्॥

