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“तुमने इस घर को लाख अपने खून से सींचा हो, पर यह घर कभी तुम्हारा नहीं हो सकता। तुम यहाँ हमेशा आउटसाइडर ही रहोगी।” (a) उक्त कथन में कौन, किसे ‘आउटसाइडर’ कह रहा है? - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

“तुमने इस घर को लाख अपने खून से सींचा हो, पर यह घर कभी तुम्हारा नहीं हो सकता। तुम यहाँ हमेशा आउटसाइडर ही रहोगी।”

  1. उक्त कथन में कौन, किसे ‘आउटसाइडर’ कह रहा है?  [1]
  2. श्रोता अपनी इस दशा के लिए किसे जिम्मेदार मानती है और क्यों? कोई दो कारण लिखिए।  [2]
  3. इस कहानी के माध्यम से कहानीकारा हमें क्या कहनाचाहती हैं?  [4]
विस्तार में उत्तर
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उत्तर

  1. उक्त कहानी में पम्मी (पूनम) नीलम को आउटसाइडर कहती है। नीलम कहानी की मुख्य पात्र है, जबकि पम्मी उसकी छोटी बहन है।
  2. प्रस्तुत कहानी में श्वेता (नीलम) अपने वर्तमान हालात के लिए स्वयं को ही उत्तरदायी मानती है। माता के देहांत और पिता की अचानक मृत्यु के बाद परिवार के भरण-पोषण तथा छोटे भाई-बहनों की शिक्षा की जिम्मेदारी नीलम पर आ गई। कम उम्र में ही उसे परिवार की पूरी जिम्मेदारी निभानी पड़ी।
  3. इस कहानी के माध्यम से लेखिका ने समाज में स्त्रियों की उपेक्षित स्थिति को उजागर करने का प्रयास किया है। लेखिका के अनुसार जब कोई स्त्री पुरुषों की तरह अपने कंधों पर परिवार की जिम्मेदारियों का भार उठाती है और निःस्वार्थ भाव से सबका पालन-पोषण करती है, तब भी समाज उसे समान अधिकार नहीं देता और आउटसाइडर ही मानता है। कहानी की नायिका नीलम ने अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन किया और परिवार के प्रति उत्तरदायित्व निभाया, फिर भी उसके अपने ही परिजनों ने उसके योगदान को महत्व नहीं दिया। उसके त्याग और समर्पण की कद्र करने के बजाय उन्होंने उसकी उपेक्षा की।
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