हिंदी

“तरु-तृण-वन- लता वसन/अंचल में खचित सुमन” वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

“तरु-तृण-वन- लता वसन/अंचल में खचित सुमन”

वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए और वन संरक्षण के लिए बनाए नियमों पर विचार कीजिए।

कृति
Advertisements

उत्तर

वनों, लताओं और पुष्पों जैसे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कानून और नियम लागू किए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वनों का संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।

भारत सरकार के प्रमुख अधिनियम

  1. वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (Forest Conservation Act, 1980) - इस अधिनियम का लक्ष्य वन क्षेत्रों की अनियंत्रित कटाई को रोकना है। इसके तहत वन भूमि का उपयोग उद्योग, खनन या अन्य गैर-वन गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।
  2. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) - यह कानून वन्य जीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) - इस अधिनियम का उद्देश्य वायु, जल और भूमि सहित संपूर्ण पर्यावरण की रक्षा करना है। इसके माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण संबंधी विभिन्न नियम लागू किए गए हैं।
  4. वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) - यह अधिनियम आदिवासी एवं वन-आश्रित समुदायों के पारंपरिक अधिकारों को मान्यता प्रदान करता है। साथ ही, वनों के संरक्षण और प्रबंधन में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

वनों की रक्षा केवल सरकारी नियमों और कानूनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें लोगों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इसके लिए हमें निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए-

  • अवैध रूप से पेड़ों की कटाई को रोकना तथा अधिकाधिक पौधे लगाना।
  • जंगलों में आग लगने और पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली गतिविधियों से बचना।
  • विभिन्न प्रकार के पौधों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच उचित सामंजस्य बनाए रखना।
  • समाज में “एक पेड़, एक जीवन” जैसी पर्यावरण-अनुकूल सोच को बढ़ावा देना।

वन मानव जीवन और प्रकृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी सुरक्षा केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। यदि हम सब मिलकर संरक्षण के प्रयास करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है।

shaalaa.com
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [पृष्ठ १७२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
अध्याय 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १७२
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×