Advertisements
Advertisements
प्रश्न
टोपी बनवाने के लिए गवरइया किस-किसके पास गई? टोपी बनने तक के एक-एक कार्य को लिखें।
Advertisements
उत्तर
टोपी बनवाने के लिए गवरइया निम्नलिखित चार लोगों के पास गई –
- धुनिया के पास – घूरे पर मिला रुई का फाहा लेकर गवरइया सबसे पहले धुनिए के पास गई। वह पहले तो गवरइया का काम करने को तैयार न था पर आधी रुई मेहनताने के रूप में पाने पर काम करने के लिए तैयार हो गया और रुई धुन दी।
- कोरी के पास – धुनिया से रुई धुनवाकर गवरइया सूत कतवाने धुनिए के पास गई। कोरी ने पहले तो मुफ्त में काम करने से मना कर दिया पर आधा सूत मेहनताना के रूप में पाने पर महीन सूत कात दिया।
- बुनकर के पास – कोरी द्वारा काता महीन सूत लेकर गवरइया बुनकर के पास गई। बुनकर ने आधे कपड़े को पारिश्रमिक के रूप में लेकर महीन कपड़ा बुन दिया।
- दर्जी के पास – पहले तो दर्जी गवरइया का काम करने को तैयार न था, परंतु जब गवरइया ने उससे कहा कि दो टोपियाँ सिलकर एक उसे दे दे तथा एक स्वयं ले ले तब वह सहर्ष काम करने को तैयार हो गया।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
सलमा का पहला कदम बीमारी में ही क्यों बढ़ा था?
लेखक ने यह अनुमान कैसे लगाया कि एक चूहा बूढ़ा है और उसको सर्दी लगती है?
इस पत्र में लेखक ने अलग-अलग तरह के पेड़-पौधों का ज़िक्र किया है। पता लगाओ, वे कौन से पेड़-पौधे हो सकते हैं। इस काम के लिए तुम अपने अध्यापकों, अपने साथियों, पुस्तकालय या अन्य साधनों की भी सहायता ले सकते हो।
| संकेत | नाम | |
| (क) जिसे नए साल पर लगाते/सजाते हैं | |
__________ |
|
(ख) सफ़ेद कुमुदनी जैसा नीला-बैंगनी फूल |
|
__________ |
|
(ग) सफ़ेद कुमुदनी जैसा नीला-बैंगनी फूल |
![]() |
गुलाब, सूरजमुखी, कनेर |
बूढ़ी अम्मा ने कहा, "वर्षा अवश्य होगी।"
क्या उन्हें मालूम था कि इस साल वर्षा होगी? या उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर केवल अंदाजा लगाया था?
बच्चों ने मंच की व्यवस्था किस प्रकार की?
केशव शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह क्यों किया?
तुमने इस पाठ में गुड़ियाघर के बारे में पढ़ा। पता करो कि 'चिड़ियाघर', 'सिनेमाघर' और 'किताबघर' कौन और क्यों बनवाता है? तुम इनमें से अपनी पसंद के किसी एक घर के बारे में बताओ जहाँ तुम्हें जाना बेहद पसंद हो।
"अनेक देशों के बच्चों की यह फ़ौज अलग-अलग भाषा, वेशभूषा में होकर बी एक जैसी ही है। कई देशों के बच्चों को इकट्ठा कर दो, वे खेलेंगे या लड़ेंगे और यह लड़ाई भी खेल जैसी ही होगी। वे रंग, भाषा या जाति पर कभी नहीं लड़ेंगे।"
ऊपर के वाक्यों को पढ़ो और बताओ कि–
(क) यह कब, किसने, किसमें और क्यों लिखा?
(ख) क्या लड़ाई भी खेल जैसी हो सकती है? अगर हो तो कैसे और उस खेल में तुम्हारे विचार से क्या-क्या हो सकता है?
"हम सब इस अभिमान के खतरों को जानते थे, हमें यह भी ज्ञात था कि शायद हम कभी वापस न लौट सकें।
"वे दस नाविक इतनी खतरनाक यात्रा के लिए क्यों निकले होंगे? आपस में चर्चा करो।
"भारत के लोगों को अंग्रेज़ सरकार का सहयोग नहीं करना चाहिए और उनका काम बंद कर देना चाहिए। अगर कोई अंग्रेज़ अन्याय करेगा तो हम अन्याय सहने से इंकार करेंगे।"
ऊपर श्रीराम राजू द्वारा आदिवासियों से गाँधी जी की कही हुई बात का उल्लेख हुआ है। गाँधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए बहुत सारी बातें कही थी। यह सब तुम्हें गाँधी जी पर लिखी गई किताबों, फ़िल्मों और अन्य जगहों पर मिल सकता है। तुम उनकी कही हुई बातों में जो बहुत महत्वपूर्ण समझो उसको अपने साथियों को बताओ।
नीचे लिखे वाक्य में मुहावरे का प्रयोग किया गया है। इस मुहावरे का प्रयोग करते हुए तुम कुछ नए वाक्य बनाओ।
आदिवासियों की हिम्मत जवाब देने लगी।
''गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।''
• लेखक को यह सुनकर हैरानी क्यों हुई?
पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, जाबू, लेख, कडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।
किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफ़ाफ़े पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है? पता कीजिए।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘ भगवान के डाकिए’ आपकी पाठ्यपुस्तक में हैउसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भाँति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए
दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?
पाठ की तीसरी साखी-जिसकी एक पंक्ति है 'मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं' के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं?
कबीर के दोहों को साखी क्यों कहा जाता है? ज्ञात कीजिए।
गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?
“लोगों के लिए यह समझना बड़ा कठिन है कि ग्रामीण औरतों के लिए यह कितनी बड़ी चीज़ है। उनके लिए तो यह हवाई जहाज़ उड़ाने जैसी बड़ी उपलब्धि है।” साइकिल चलाना ग्रामीण महिलाओं के लिए इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है? समूह बनाकर चर्चा कीजिए।


