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आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल 'दोषों का पर्दाफ़ाश' कर रहे हैं। इस प्रकार समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए।

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प्रश्न

आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल 'दोषों का पर्दाफ़ाश' कर रहे हैं। इस प्रकार समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

टीवी चैनल व समाचार पत्रों द्वारा जो 'दोषों का पर्दाफ़ाश' किया जा रहा है वो पहले किसी सीमा तक सही हुआ करता था। परन्तु, आज टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की भरमार के कारण उनके बीच में जनमें श्रेष्ठ-दिखाने-की-होड़ ने इसे धंधा बना दिया है। इससे लोग दोनों पक्षों की सच्चाई जाने बिना ही अपनी तरफ़ से दोषारोपण आरम्भ कर देते हैं। इस बात को तनिक भी नहीं सोचते कि इससे किसी के जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है। समाचार पत्र और चैनल सिर्फ अपनी T.R.P.का ही ध्यान रखते हैं। सच तो जैसे कुछ होता ही नहीं है। जैसे आरूषि हत्याकांड में आरूषि के पिता पर हत्या का आरोप लगाया गया। मीडिया ने भी इस विषय को खूब भुनाया परन्तु अंत में वो निर्दोंष पाये गये। जितनी बड़ी हानि तलवार दंपत्ति को हुई, उसका कोई हिसाब नहीं है पर समाचार पत्रों व टीवी चैनलों के लिए यह T.R.P. बढ़ाने का एक साधन मात्र था, सच्चाई सामने लाने का नहीं। दूसरा उदाहरण एक स्कूल शिक्षिका पर स्कूल की लड़कियों को देह-व्यापार में डालने का आरोप लगाया गया। एक न्यूज़ चैनल द्वारा इसका पर्दाफ़ाश किया गया था परन्तु जब सच सामने आया तो पाया गया कि वो बिल्कुल निर्दोष थी। क्या उस चैनल द्वारा किया गया कार्य उचित था? जो भी हो, इस से चैनलों की सार्थकता पर सवाल ज़रूर उठता है।

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गद्य (Prose) (Class 8)
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अध्याय 7: क्या निराश हुआ जाए - पर्दाफ़ाश [पृष्ठ ४३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Vasant Bhag 3 Class 8
अध्याय 7 क्या निराश हुआ जाए
पर्दाफ़ाश | Q 2 | पृष्ठ ४३

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क्रम सं.

खाने की चीज़ों 

पोषक तत्व

(क)

पालक

______

(ख)

गाजर

______

(ग)

दूध

______

(घ)

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______

(ङ)

दालें

______


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