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स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करने वाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ

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प्रश्न

स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करने वाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भावे ओज से मुखर हुए हैं।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

(क) द्वार बालिका खोल, चल, भूडोल कर दें,
एक हिमगिरि, एक सिर का मोल कर दें,
मसल कर अपने इरादों-सी उठाकर,
दो हथेली है कि पृथ्वी गोलकर दें। -माखनलाल चर्तुवेदी

(ख) विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो परंतु यो मरो कि याद जो करे सभी।
हुई न यो सु-मृत्यु तो वृथा मरे वृथा जिए।
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप-आप ही चरे
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे। -मैथिलीशरण गुप्त
बाधाएँ आएँ तन पर,
देखें तुझे नयन मन भर,
मुझे देख तू सजल दृगों से
अपलक उर के शतदल पर;
क्लेद-युक्त, अपना तने दूंगा,
मुक्त करूंगा तुझे अटल,
तेरे चरणों पर देकर बलि,
सकल श्रेय-श्रम संचित फल । -सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

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पद्य (Poetry) (Class 7)
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अध्याय 20: विप्लव - गायन - कविता से आगे [पृष्ठ १४२]

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एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 2 Class 7
अध्याय 20 विप्लव - गायन
कविता से आगे | Q 1 | पृष्ठ १४२

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