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सोहत है चँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है। वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है।। (1) संजाल पूर्ण कीजिए: कृष्ण का निरंतर गुणगान करने वाले - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सोहत है चँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है।
वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है।।
‘रसखान’ बिलोकत बौरी भई, दृग मूँदि कै ग्वालि पुकार हँसी है।
खोलि री घूँघट, खोलौं कहा, वह मूरति नैनिन माँझ बसी है।।

सेस, गनेस, महेस, दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं।
जाहि अनादि, अनंत, अखंड, अछेद, अभेद, सुबेद बतावैं।।
नारद से सुक व्यास रटें, पचिहारे तऊ पुनि पार न पावैं।
ताहि अहिर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए:  (2)

(2) प्रथम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

आकलन
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उत्तर

(1)

(2) श्रीकृष्ण के सिर पर चंद्रमा के समान सुंदर मोर मुकुट शोभायमान है। उनके चरण कमल की तरह सुंदर और आकर्षक हैं। उनके ललाट पर गौरवपूर्ण तिलक सुशोभित है, जो उनके हृदय में विराजमान वनमाला के समान प्रतीत होता है।

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