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संस्था अपने आप चलेगी। समाज में ऐसी संस्था की अत्यंत आवश्यकता है। उस आवश्यकता में से ही उसका जन्म होगा। मुझे इतना विश्वास न होता तो बहन के लिए ऐसा कुछ मैं सूचित ही नहीं करता। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्था अपने आप चलेगी। समाज में ऐसी संस्था की अत्यंत आवश्यकता है। उस आवश्यकता में से ही उसका जन्म होगा। मुझे इतना विश्वास न होता तो बहन के लिए ऐसा कुछ मैं सूचित ही नहीं करता। तुम दोनों इस सूचना का प्रार्थनापूर्वक विचार करना लेकिन जल्दी में कुछ तय न करके यथासमय मुझे उत्तर देना। बहन यदि हाँ कहे तो अभी से आगे का विचार करने लगूँगा।

यहाँ सरदी अच्छी है। फूलों में गुलदाउदी, क्रिजेन्थीमम फूल बहार में हैं। उसकी कलियाँ महीनों तक खुलती ही नहीं मानो भारी रहस्य की बात पेट में भर दी हो और होठों को सीकर बैठ गई हों। जब खिलती हैं तब भी एक-एक पंखुड़ी करके खिलती हैं। वे टिकते हैं बहुत। गुलाब भी खिलने लगे हैं। कोस्मोस के दिन गए। उन्होंने बहुत आनंद दिया। जिनिया का एक पौधा, रास्ते के किनारे पर था जो आए सो उसकी कली तोड़े। फिर मैंने इस बड़े पौधे को वहाँ से निकालकर अपने सिरहाने के पास लगा दिया, फिर इसने इतने सुंदर फूल दिए। इसकी आँखें मानो उत्कटता से बोलती हों, ऐसी लगतीं। दो-एक महीने फूल देकर अंत में वह सूख गया। परसों ही मैंने उसे बिदा दी।

  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]
  2. एक/दो शब्दों में उत्तर लिखिए:     [2]
    1. ये फूल भी खिलने लगे − .........................

    2. गद्यांश में उल्लिखित मौसम − .........................

    3. इन फूलों ने अधिक आनंद दिया − .........................

    4. लेखक ने इस फूल को विदा दी − .........................

  3.  शब्द संपदा:        
    1.  जिनका एकवचन और बहुवचन रूप गद्यांश में प्रयुक्त है ऐसा शब्द ढूँढ़कर लिखिए:     [1]
      ......................... _ .........................
    2. कृति पूर्ण कीजिए:        [1]
      उपसर्गयुक्त शब्द
      ← शब्द → प्रत्यययुक्त शब्द
        ← दिन →  
  4. ‘जीवन जीने की प्रेरणा फूलों से प्राप्त होती है’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]
आकलन
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उत्तर



  1.  
    1. गुलाब

    2. सरदी

    3. कोस्मोस

    4. जिनिया

  2.       
    1.  पौधा − पौधे।

    2. उपसर्गयुक्त शब्द
      ← शब्द → प्रत्यययुक्त शब्द
       सुदिन/दुर्दिन ← दिन →  दैनिक
  3. फूलों से हमें जीवन को सुंदर और सार्थक ढंग से जीने की प्रेरणा मिलती है। खिले हुए फूल सौंदर्य और खुशियों का प्रतीक होते हैं। वे हमें सदा प्रसन्न रहने और सुंदरता से जीने का संदेश देते हैं। फूल बिना किसी स्वार्थ के अपनी खुशबू फैलाते रहते हैं, जिससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें भी अच्छे कार्यों द्वारा अपनी पहचान बनानी चाहिए। वे हर समय मस्ती और निश्चिंतता से झूमते रहते हैं, जिससे हमें वर्तमान में जीने की प्रेरणा मिलती है। फूल कभी यह नहीं सोचते कि उन्हें तोड़ दिया जाएगा, जिससे हमें यह संदेश मिलता है कि भविष्य की चिंता किए बिना जीवन को खुलकर जीना चाहिए। वे अपने अंत की चिंता नहीं करते, जिससे हमें मृत्यु से डरने की बजाय जीवन को सकारात्मक रूप से जीने की प्रेरणा मिलती है। इस तरह, फूल हमें हर रूप में प्रेरित करते हैं कि हम जीवन को बेहतर और सकारात्मक ढंग से जिएँ।
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