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सम्प्रेषण की किन्हीं चार संकेतिक बाधाओं को समझाइए।

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प्रश्न

सम्प्रेषण की किन्हीं चार संकेतिक बाधाओं को समझाइए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

सम्प्रेषण की संकेतिक बाधाएँ वे बाधाएँ हैं जो शब्दों, चिन्हों या भाषा के अर्थ से संबंधित होती हैं। चार प्रमुख संकेतिक बाधाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. शब्दों के भिन्न अर्थ: कई शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, जिससे संदेश का गलत अर्थ निकाला जा सकता है। इससे प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच भ्रम उत्पन्न होता है। ऐसी स्थिति में संचार का उद्देश्य सही रूप से पूरा नहीं हो पाता है।
  2. अस्पष्ट या जटिल भाषा: यदि संदेश में कठिन, तकनीकी या अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया जाए, तो प्राप्तकर्ता उसे सही ढंग से समझ नहीं पाता। इससे संचार की प्रभावशीलता कम हो जाती है। सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग इस बाधा को कम कर सकता है।
  3. खराब अनुवाद: एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करते समय शब्दों का सही अर्थ न पहुँच पाने से संदेश विकृत हो सकता है। इससे गलतफहमी और भ्रम पैदा होता है। विशेष रूप से बहुभाषी संगठनों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
  4. अस्पष्ट धारणाएँ: जब प्रेषक यह मान लेता है कि प्राप्तकर्ता सभी बातों को पहले से समझता है, तो वह स्पष्ट रूप से संदेश नहीं देता। इससे संदेश अधूरा या गलत समझा जा सकता है। इसलिए संदेश को स्पष्ट और पूर्ण रूप से व्यक्त करना आवश्यक होता है।

इस प्रकार, संकेतिक बाधाएँ सम्प्रेषण की प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं और इन्हें दूर करना आवश्यक होता है।

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2025-2026 (March) 66/5/2

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