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प्रश्न
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| पन्नगभूषणः | ..... | ..... |
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उत्तर
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| पन्नगभूषणः | पन्नगः भूषणं यस्य सः | बहुव्रीहिः। |
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संबंधित प्रश्न
सङ्ख्याः अक्षरैः/अङ्कंः लिखत ।
षट्सप्ततिः - ______
सूचनानुसारं कृतीः कुरुत ।
अहं वाणिज्यशाखायाः स्नातकः।
(वाक्य बहुवचने परिवर्तयत ।)
योग्यं पर्यायं चिनुत ।
त्वं धनुः ______।
उत्तरपदं लिखत।
जम्बूकोऽयम् = जम्बूकः + ______।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
भवानपि अपरिचितः एव आसीत्। (‘भवान्’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत।)
सन्धिविग्रहं कुरुत।
सारथिरपि।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| भुजगयमिताः | ...... | ...... |
सूचनानुसार कृती: कुरुत।
वयं तु केवलं तस्य महाभागस्य नामधेयं जानीमः। (वाक्यम् एकवचने परिवर्तयत।)
सूचनानुसार कृती: कुरुत।
भवान् स्वीकरोतु। (‘भवान्’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत।)
सूचनानुसार कृती: कुरुत।
अहं विस्तरेण पठितुम् इच्छामि। (वाक्यं लङ्लकारे परिवर्तयत।)
नामतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
| ______ | ______ | बलवतः | द्वितीया |
नामतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
| ______ | त्वचोः | ______ | षष्ठी |
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुष: | लकारः |
| ______ | जीवतः | ______ | प्रथमः | लट् |
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुषः | लकारः |
| मुञ्चानि | ______ | ______ | उत्तमः | लोट् |
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुष: | लकार: |
| ______ | ______ | चिन्तयामहै | उत्तमः | लोट् |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| सविनयम् | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| जपाकुसुमम् | ..... | ..... |
नामतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव | ब.व. | विभक्तिः |
| रज्जवे | ______ | ______ | चतुर्थी |
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
सर्कसस्वामिनः विवशता मया अवगता।
सन्धिविग्रहं कुरुत।
ततस्सा।
सर्वनाम-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| ...... | ...... | ताः | प्रथमा |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| सद्गुणसम्पत्तिः | ..... | ..... |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
अहं वाणिज्यशाखायाः स्नातकः। (बहुवचने परिवर्तयत।)
अस्माभिः संस्कृतस्य अध्ययनं ______ कृतम्।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| समीपस्थः | ...... | ...... |
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुषः | लकारः |
| ______ | लिखेतम् | ______ | मध्यमः | विधिलिङ् |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत।
| धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ/शानच् |
| पूज् (१० उ.प.) | ______ | ______ | पूज्यः | पूजयमानः |
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
नवसप्ततिः
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
८०
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
८२
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| व्याघ्रभल्लूकौ | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| महाविद्यालयः | ...... | ...... |
लकारं लिखत।
तत्प्राप्तुं यतस्व। = ......
लकारं लिखत।
सः मृगं बन्धनात् व्यमुञ्चत्। = ......
लकारं लिखत।
स मूल्यं मह्यं दद्यात्। = .......
लकारं लिखत।
आत्मा कृतार्थतां लभताम्। = ......
सङ्ख्या: अङ्कैः लिखत।
षटत्रिंशत् -
मञ्जूषात: क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित विशेषणम् |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - आनयति, हत:, अगच्छत्, कर्तव्यम्, भवेत्)
