Advertisements
Advertisements
प्रश्न
समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत लिखत च।
पक्षिराजः, शूलपाणिः, जलम्, मेघः, शङ्करः, वृक्षः, सिद्धयोगी, गरुडः, तरुः, तोयम्, जलदः, तपस्वी।
Advertisements
उत्तर
| पक्षिराजः | गरुडः |
| शूलपाणिः | शङ्करः |
| जलम् | तोयम् |
| मेघः | जलदः |
| सिद्धयोगी | तपस्वी |
| वृक्षः | तरुः |
संबंधित प्रश्न
सन्धिविग्रहं कुरुत।
त्यजेत्सुखम् = ______
विरुद्धार्थकशब्द लिखत।
अधिकम् × ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
भारः - ______
सन्धिविग्रह कुरुत।
नार्यस्तु = ______
एकवचने परिवर्तयत।
एताः न पूज्यन्ते।
सन्धिविग्रहं कुरुत।
विश्वम् + अम्भसा = ______।
समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत।
शरीरम्, मृत्तिका, चरणौ, मित्रम्, मनः, मृद्, सुहृद्, चित्तम्, पादौ, देहः
शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।
क्वचित् - ______
सूचनानुसारं वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
छात्राः अमरकोषं कण्ठस्थं कुर्वन्ति स्म। ('स्म' निष्कासयत)
सूचनानुसारं वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
वयमपि अमरकोषं कण्ठस्थं कुर्याम। (एकवचनं कुरुत।)
समानार्थकशब्दं लिखत।
अमरकोषः - ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
विपरीतोऽपि = ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
ममाज्ञया = ______
सन्धि कुरुत।
तस्य + आदिः (अ + आ) = ______
अधोदत्तं वाक्यं श्लोकस्थ-समानार्थक -शब्दैः पुनः लिखत।
हरिणः शष्पाणि भक्षयति तथापि व्याधः तस्य शत्रुः भवति।
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
त्वं धनिनां वक्त्रं मुहुः न ईक्षसे।
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
त्वं निद्रागमे निद्रासि।
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
वदनम् - ______
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
असत्यम् - ______
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
मृगः - ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
तस्याधस्तात् = ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
ततोऽहम् = ______
वर्णविग्रहं कुरुत।
दुर्भिक्षम् - ______
वर्णविग्रहं कुरुत।
रूपाढ्याम् - ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
अश्वः - ______
समस्तपदं कुरुत।
लगुडस्य प्रहारः - ______
शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।
वेदान्तम् = ______
सवर्णदीर्घसन्धिः।
अ/आ + अ/आ = आ
______ + अत्र = तथात्र।
सवर्णदीर्घसन्धिः।
इ/ई + इ/ई = ई
पठति + ______ = पठतीति
सवर्णदीर्घसन्धिः।
इ/ई + इ/ई = ई
______ + इव = नदीव।
सवर्णदीर्घसन्धिः।
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
______ + उत्साहः = वधूत्साहः।
सवर्णदीर्घसन्धिः।
ऋ, ॠ + ऋ ,ॠ = ॠ
______ + ऋणम् = मातृणम्।
भवान्/भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
भवन्तः भद्राणि पश्यन्तु।
अयादिसन्धिः।
ए/ए + कोऽपि स्वरः = अय्/आय्
______ + अपि = मत्यायपि/मत्या अपि।
विशेषण-विशेष्ययोः युग्मं पूरयत।
| पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् | विभक्तिः |
| पवित्रः जलाशयः | (पवित्र) नदी | (पवित्र) गङ्गाजलम् | प्रथमा |
| (नूतन) मण्डपम् | नूतनां भाषाम् | (नूतन) मन्दिरम् | द्वितीया |
| समृद्धेन (कोष) | (समृद्ध) परम्परया | समृद्धेन (नगर) | तृतीया |
| (कोमल) स्वभावाय | कोमलायै (लता) | (कोमल) पुष्पाय | चतुर्थी |
| प्राधीनात् (उपाय) | (पराधीना) बुद्ध्याः | (पराधीन) जीवनात् | पञ्चमी |
| (उत्तम) पुरुषस्य | उत्तमायाः (पत्रिका) | उत्तमस्य (वृत्तपत्र) | षष्ठी |
| (स्थूल) पुत्रे | स्थूलायाम् (कन्या) | (स्थूल) पात्रे | सप्तमी |
| हे (श्रेष्ठ) ऋषे | हे श्रेष्ठे (तपस्विनी) | हे (श्रेष्ठ) औषध | सम्बोधनम् |
योग्यरूपं योजयत।
सर्वे ______ ज्ञानं पूजयन्ति। (जिज्ञासु)
योग्यरूपं योजयत।
______ पूर्णे नेत्रे। (अश्रु)
पूर्वकालवाचक-धातुसाधित-अव्ययं उपयुज्य वाक्यं लिखत।
प्रश्नं ______ (प्रच्छ्) सः धैर्येण अग्रे आगच्छत्।
आज्ञार्थ-रूपाणि चिनुत लिखत च।
अम्ब, अपि आपणात् शाकानि आनयानि?
विधिलिङ्रूपाणि चिनुत लिखत च।
बालाः सर्वदा गुरूणाम् आज्ञां पालयेयुः।
रूपाभ्यासं कुरुत।
रचयेम
उचितलिङ्गानुसार पृथक्कुरुत।
| पुं. | स्त्री. | नपुं. |
| ______ | ______ | ______ |
(योषित्, भूभृत्, दिनकृत्, विद्युत्, वियत्, क्ष्माभृत्, तडित्)
अधोदत्तान् शब्दान् पठत। एते शब्दस्य समासे कां विभक्तिम् अपेक्षन्ते इति लिखत।
विकल - ______
लकार-तालिकां पूरयत।
लृट् |
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
| क्षालयिष्यति | ______ | ______ | प्रथमपुरुषः | |
| ______ | वर्धिष्येथे | ______ | मध्यमपुरुषः | |
| ______ | ______ | कोपिष्यामः | उत्तमपुरुषः |
रूपाणि परिचिनुत।
| अ. क्र. | धातुः | गणः/पदं | कालः | पुरषः | वचनम् | |
| १ | प्राप्स्यामि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| २ | अहरत् | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ३ | पूज्यते | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ४ | चोरयतु | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
सन्धिकोषः।
चाङ्गलाघवम् - च + ______।
सन्धिकोषः।
जानोर्महिर्वेष्टितवामपाद्म् = जानोः + बहिः + ______।
सन्धिकोषः।
श्रीमस्त्यनाथोदितमासनं = श्रीमस्त्यनाथोदितम् + ______।
सन्धिकोषः।
जनसङ्गश = ______ + च।
सन्धिकोषः।
इत्येव = ______ + एव।
सन्धिकोषः।
अधुनापि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
सर्वास्तत्राफलाः = ______ + ______ + अफलाः।
सन्धिकोषः।
कथमिव = ______ + इव।
सन्धिकोषः।
प्रतिदिनमिव = ______ + इव।
सन्धिकोषः।
स्वदेशमपाहरन् = ______ + अपाहरन्।
सन्धिकोषः।
______ = पणिभिः + यद्।
सन्धिकोषः।
तन्न = ______ + न।
सन्धिकोषः।
गमनमारभे = गमनम् + ______।
सन्धिकोषः।
शक्रादपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
ततस्तेन = ______ + तेन।
सन्धिकोषः।
______ = यथा + एव।
सन्धिकोषः।
तद्यथा = ______ + यथा।
'सर्व' नपुंसकलिङ्गं सर्वनाम।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| सर्वम् | ______ | ______ | प्रथमा |
| सर्वम् | ______ | ______ | द्वितीया |
| सर्वेण | ______ | ______ | तृतीया |
| सर्वस्मै | ______ | ______ | चतुर्थी |
| सर्वस्मात् | ______ | ______ | पञ्चमी |
| सर्वस्य | ______ | ______ | षष्ठी |
| सर्वस्मिन् | ______ | ______ | सप्तमी |
| हे सर्वे | ______ | ______ | सम्बोधनम् |
'इदम्' सर्वनाम नपुंसकलिङ्गम्।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| इदम् | ______ | ______ | प्रथमा |
| इदम्/एनत् | ______ | ______ | द्वितीया |
भवत् आदरार्थकं सर्वनाम।
भवत् - पुंलिङ्गम्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| भवान् | ______ | ______ | प्रथमा |
| भवन्तम् | ______ | ______ | द्वितीया |
| भवता | ______ | ______ | तृतीया |
| भवते | ______ | ______ | चतुर्थी |
| भवतः | ______ | ______ | पञ्चमी |
| भवतः | ______ | ______ | षष्ठी |
| भवति | ______ | ______ | सप्तमी |
| हे भवन् | ______ | ______ | सम्बोधनम् |
केवलं प्रथमपुरुषस्य क्रियापदेन सह उपयुज्यते किन्तु मध्यमपुरुषस्य दर्शकम्। यथा -
| कर्तृपदम् | लट्लकारः | लङ्लकारः | लोट्लकारः | विधिलिङ्लकारः |
| भवान्/भवती | ______ | ______ | ______ | ______ |
| त्वम् | ______ | ______ | ______ | ______ |
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
प्रति = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
दा-यच्छ् = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
कथ् = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
रक्ष् = ______
