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प्रश्न
समान ज्यामिती वाले यौगिकों का चुंबकीय आघूर्ण भिन्न क्यों होता है?
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उत्तर
संकुलों में यह दुर्बल और प्रबल लिगंडों की उपस्थिति के कारण होता है, जिसके फलस्वरूप इनकी CFSE भिन्न होती है। यदि CFSE उच्च है तो संकुल चुंबकीय आघूर्ण का निम्न मान दर्शाता है तथा इसके विपरीत भी। उदाहरणार्थ [CoF6]3− और [Co(NH3)6]3+, पहले वाला अनुचुंबकीय होता है और बाद वाला प्रतिचुंबकीय होता है।
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उभयदंती लिगंड के कारण उपसहसंयोजन यौगिक समावयवता दर्शाते हैं। पैलेडियम के [Pd(C6H5)2(SCN)2] और [Pd(C6H5)2(NCS)2] संकुल हैं ______।
यौगिक [Co(SO4)(NH3)5]Br और [Co(SO4)(NH3)5]Cl ______ प्रदर्शित करते हैं।
[Cr(H2O)6]Cl3 (बैंगनी) और [Cr(H2O)5Cl]Cl2⋅H2O (सलेटी-हरा) के बीच कौन-से प्रकार की समावयवता पाई जाती है?
निम्नलिखित में से ध्रुवण घूर्णक यौगिकों को पहचानिए।
(i) [Co(en)3]3+
(ii) विपक्ष - [Co(en)2Cl2]+
(iii) समपक्ष - [Co(en)2Cl2]+
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निम्नलिखित में से कौन-से संकुल बंधनी समावयवता प्रदर्शित करते हैं?
(i) [Co(NH3)5(NO2)]2+
(ii) [Co(H2O)5CO]3+
(iii) [Cr(NH3)5SCN]2+
(iv) [Fe(en)2Cl2]+
एक [M(AA)2X2]n+ प्रकार का संकुल ध्रुवण घूर्णक है। यह संकुल की संरचना के विषय में क्या इंगित करता है? ऐसे संकुल का एक उदाहरण दीजिए।
कॉलम I में दी गई संकुल स्पीशीज़ और कॉलम II में दिए गए समावयवता के प्रकारों को सुमेलित कीजिए और सही कोड प्रदान कीजिए।
| कॉलम I (संकुल स्पीशीज़) | कॉलम II (समावयवता) |
| (A) [Co(NH3)4Cl2]+ | (1) ध्रुवण |
| (B) समपक्ष–[Co(en)2Cl2]+ | (2) आयनन |
| (C) [Co(NH3)5(NO2)]Cl2 | (3) उपसहसंयोजन |
| (D) [Co(NH3)6][Cr(CN)6] | (4) ज्यामितीय |
| (5) बंधनी |
अभिकथन: उभयदंती लिगंडों वाले उपसहसंयोजन यौगिकों में बंधनी समावयवता होती है।
तर्क: उभयदंती लिगंडों में दो भिन्न दाता परमाणु होते हैं।
अभिकथन: MX6 और MX5L प्रकार के संकुल (X और L एकदंती हैं) ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करते।
तर्क - उपसहसंयोजन संख्या 6 वाले संकुल ज्यामितीय समावयवता नहीं दशाते।
