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स्कोलियोसिस तथा लॉर्डोसिस विकृतियों में अंतर स्पष्ट कीजिए। - Physical Education (शारीरिक शिक्षा)

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प्रश्न

स्कोलियोसिस तथा लॉर्डोसिस विकृतियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

अंतर स्पष्ट करें
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उत्तर

अ.क्र. आधार स्कोलियोसिस विकृतियाँ लॉर्डोसिस विकृतियाँ
1. वक्रता का प्रकार पार्श्व (किनारे की ओर) वक्रता, जिसके कारण रीढ़ की हड्डी “S” या “C” आकार की दिखाई देती है। कमर के क्षेत्र (निचली पीठ) में अत्यधिक अंदर की ओर झुकाव (आगे की ओर झुकाव)।
2. भौतिक उपस्थिति अक्सर इससे कंधे असमान हो जाते हैं, एक कंधा ज़्यादा उभरा हुआ दिखता है, या कूल्हे असमान हो जाते हैं। इससे नितंब अधिक उभरे हुए दिखाई देते हैं, और लेटते समय पीठ के निचले हिस्से तथा किसी समतल सतह के बीच एक बड़ा अंतर बन जाता है।
3. सामान्य स्थान यह अक्सर थोरैसिक (पीठ के मध्य भाग) या थोरैको-लम्बर (पीठ के मध्य-निचले भाग) क्षेत्र में होता है। यह मुख्य रूप से लम्बर (निचली) रीढ़ को प्रभावित करता है, हालाँकि यह सर्वाइकल (गर्दन की) रीढ़ में भी हो सकता है।
4. कारण अक्सर इडियोपैथिक (अज्ञात कारण वाला) होने के कारण, एडोलसेंट इडियोपैथिक स्कोलियोसिस (AIS) आम है। अक्सर खराब पोस्चर, चोटों, मांसपेशियों के असंतुलन या मोटापे जैसी स्थितियों से जुड़ा होता है।
5. लक्षण अक्सर हल्के मामलों में यह दर्द-रहित होता है, लेकिन इससे पीठ दर्द या, गंभीर मामलों में, साँस लेने में तकलीफ़ हो सकती है। मुख्य रूप से यह पीठ के निचले हिस्से में दर्द, बेचैनी और अकड़न पैदा करता है।
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2025-2026 (March) Set 4

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