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“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।” हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके

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प्रश्न

“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”

हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

लघु उत्तरीय
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उत्तर

हाँ, कभी-कभी मैं रास्ता भूल गया था। तब मैंने सबसे पहले घबराए बिना रुककर चारों ओर देखा। फिर मैंने परिचित जगहें पहचानीं, जैसे दुकान, स्कूल, पार्क, मंदिर या गाँव की चौकी। इसके बाद मैंने किसी विश्वास योग्य व्यक्ति से मार्ग पूछा, जैसे दुकानदार, टीचर, पुलिसवाला या सरकारी भवन का कर्मचारी। इसी तरह मुझे अपना गंतव्य पता लगा।

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अध्याय 1: दो बैलों की कथा - अभ्यास [पृष्ठ २३]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga Class 9
अध्याय 1 दो बैलों की कथा
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ २३
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