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“शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?

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प्रश्न

“शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

“शतमुख- शतरव मुखरे!” पंक्ति का भावार्थ है- सौ मुखों से निकलने वाली अनेक आवाज़ें। यह भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है। भारत के विभिन्न राज्यों के त्योहार (जैसे दीवाली, पोंगल, ओणम, ईद) और परंपराएँ अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी भारतीयता के एक ही बंधन से जुड़े हुए हैं। जब ये विविध स्वर मिलकर भारतमाता की स्तुति करते हैं, तो वे एक मजबूत सामूहिक भावना को जन्म देते हैं, जो ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती है।

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अध्याय 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [पृष्ठ १७०]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
अध्याय 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १७०
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