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प्रश्न
श्रीकृष्ण गोपियों को माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुराने वाला भी कहा गया हैइसके लिए एक शब्द दीजिए
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उत्तर
माखन चोर।
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संबंधित प्रश्न
फ़र्श पर सभी के द्वारा कुछ न कुछ काम करने की बात कविता में हुई है, मगर महरी के काम को ही कविता लिखना क्यों कहा गया है?
तुम्हारे विचार से यह किस मौसम की कविता हो सकती है?
नीचे लिखी चीज़ों जैसी कुछ और चीज़ों के नाम सोचकर लिखो–
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(क) |
जुगनू जैसे चमकीले | _____________ |
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(ख) |
तारों जैसे झिलमिल | ____________ |
| (ग) | हीरों जैसे दमकते | ______________ |
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(घ) |
फूलों जैसे सुंदर |
_______________ |
"जी होता, इन ओस कणों को
अंजलि में भर घर ले आऊँ"
'घर शब्द का प्रयोग हम कई तरह से कर सकते हैं। जैसे -
(क) वह घर गया।
(ख) यह बात मेरे मन में घर कर गई।
(ग) यह तो घर-घर की बात है।
(घ) आओ, घर-घर खेलें।
'बस' शब्द का प्रयोग कई तरह से किया जा सकता है। तुम ‘बस’ शब्द का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाओ।
(संकेत - बस, बस-बस, बस इतना सा)
नीचे शब्दों के बदलते रूप को दर्शाने वाला नमूना दिया गया है। उसे देखो और अपनी सुविधानुसार तुम भी दिए गए शब्दों को बदलो।
नमूना → गिरना –गिराना –गिरवाना
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उठना |
______ |
______ |
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पढ़ना |
______ |
______ |
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करना |
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______ |
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फहरना |
______ |
______ |
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सुनना |
______ |
______ |
"हरा खेत जब लहराएगा
हरी पताका फहराएगा
छिपा हुआ बादल तब उसमें
रूप बदलकर मुसकाएगा"
कविता में हम पाते हैं कि सावन की हरियाली बादलों के कारण ही हुई है इसलिए कवि को उस हरियाली में मुसकराते बादल ही दिखाई देते हैं। बताओ, कवि को इन सब में कौन दिखाई दे सकता है–
(क) गर्म हवा। लू के थपेड़े।
(ख) सागर में उठती ऊँची-ऊँची लहरें।
(ग) सुगंध फैलाता हुआ फूल।
(घ) चैन की नींद सोती हुई बालिका।
"काले बादल तनिक देख तो।"
तुम भी अपने ढंग से 'तनिक' शब्द का इस्तेमाल करते हुए पाँच वाक्य बनाओ।
कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है।
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूट जाते हैं।
कवि अपनी कविता में एक कल्पनाशील कार्य की बात बता रहा हैअनुमान कीजिए और लिखिए कि उसके बताए कार्यों का अन्य किन-किन संदर्भो से संबंध जुड़ सकता है? जैसे नन्हे-मुन्ने बालक को माँ जगा रही हो।
कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?
एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।” दूसरी पंक्ति में उसने यह कहकर अपने अस्तित्व को महत्त्व दिया है कि “मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।” यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं। उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं?
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''नहीं'' और ''अभी भी'' को एक साथ प्रयोग करके तीन वाक्य लिखिए और देखिए 'नहीं' 'अभी भी' के पीछे कौन-कौन से भाव छिपे हो सकते हैं?
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